Sonbhadra News: स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव में प्रसूता की बनी जान पर आफत, सहारा बनी बोलेरों वाहन.
सोनभद्र जिले के चोपन ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का एक और मामला सामने आया है। खाड़र पनारी गांव की एक महिला को ओबरा डिग्री कॉलेज के पास मज़बूरी में बोलेरो वाहन में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। परिजनों ने बताया कि उनके गांव में सरकार की एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं है।
sonbhadra
3:13 PM, Sep 7, 2025
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वाहन में ही बच्चे को जन्म दिलाने का उठाया गया रिस्क।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
चोपन ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ओबरा डिग्री कॉलेज के पास बोलेरों में एक महिला ने नवजात को जन्म दिया हालांकि साथ में आशा कार्यक्रती मौके पर मौजूद थी। साथ में आये महेंद्र सिंह ने बताया कि वो खाड़र पनारी के निवासी है। हमारे क्षेत्र में एम्बुलेंस नहीं जाती इस वजह से निजी साधन बुक करके ओबरा परियोजना अस्पताल के लिए निकले थे दर्द पीड़ा होने के बाद बोलेरों वाहन में ही बच्चे का जन्म हो गया।
एम्बुलेंस की सुविधा से नहीं आने पर महेंद्र सिंह ने बताया कि हमारे गांव में एम्बुलेंस नहीं जाती जिस वजह से हम गांव वालों को निजी साधन का सहारा लेना पड़ता है। आज भी एम्बुलेंस न आने की बात सोचकर हम लोग निजी साधन से अस्पताल के लिए निकल लिए। पूर्व में कई बार एम्बुलेंस को कॉल कर बुलाया गया था उन्होंने रास्ता ख़राब का बहाना कर आने से इंकार कर दिया था।
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गांव वाले कई बार एम्बुलेंस को कॉल कर चुके है सुविधा लेने के लिए लेकिन हर बार न आने की वजह से एम्बुलेंस को कॉल करना ही गांव वालों ने छोड़ दिया। मजबूरन अपना पैसा खर्च कर लोग निजी साधन से अस्पताल जाते है इलाज के लिए। डिलेवरी के कई ऐसे मामले पूर्व में भी हो चुके है। रात में एम्बुलेंस तो बिलकुल ही नहीं आती। हमलोग गरीब है हमारी कोई नहीं सुनेगा इस लिए लाख परेशानियां के बाद भी हमलोग किसी से शिकायत नहीं करते और चुप मारकर किसी तरह ज़िन्दगी गुसर बसर कर रहे है। बात यहां समझने लायक यह भी है कि जब बोलेरों वाहन क्षेत्र में साधन के रूप में उपलब्ध हो सकती है तो फिर एम्बुलेंस कैसे क्षेत्र में ख़राब रोड की वजह से नहीं जा सकती।
बता दे कि बीते दिनों ही बीजपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से नवजात का जन्म खुले आसमान के नीचे हो गया था। मामला सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग की बहुत ज्यादा किरकिरी हुई थी। अब एम्बुलेंस के गांव में न जाने से पीड़ित परिवार पर जो आपबीती बीती है उसका जिम्मेदार कौन होगा। अगर प्रसव के दौरान महिला के साथ कोई अनहोनी हो जाती तो कौन जिम्मेदार होता। स्वास्थ्य विभाग तो मामले से अनभिज्ञ होकर पला झाड़ देता। डबल इंजन की सरकार जनता को सभी प्रकार की बेहतर सुविधाएं देने का दम खम भर्ती नज़र आती है लेकिन अरबो-खरबो का राजस्व देने वाले सोनभद्र जिले के आदिवासी क्षेत्र की जनता को खून की आंशु रोने के लिए छोड़ दे रही है। स्वास्थ्य विभाग की शायद मंशा हो की सरकारी सुविधा न दी जाये जिससे प्राइवेट अस्पतालों की तरफ मरीज़ रुख करे और उनकी जेब भरे।



