Sonbhadra News: रात भर तड़पते रहे बाइक सवार घायल, मोबाइल टावर न होना बनी समस्या.
हाथी नाला जंगल में बीती रात करीब 10 बजे बाइक से ससुराल जा रहे दो युवकों की बाइक अनियंत्रित होकर गड्ढे में गीरी। जिससे दोनों को गंभीर चोटें आई रात के अंधेरे और जंगल के कारण पूरी रात दोनों मदद की गुहार लगाते रहे परंतु कोई भी राहगीर या गाड़ी वाला उनके मदद को नहीं आया। जंगल में मोबाइल टावर भी काम नहीं करता, जिसके कारण मोबाइल होने के बावजूद हो अपने परिवार वालों से संपर्क नहीं कर पाए।
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2:53 PM, Jan 25, 2026
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घायलों का इलाज़ करते डॉक्टर।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
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दुद्धी तहसील क्षेत्र के हाथी नाला जंगल में बीती रात करीब 10 बजे बाइक से ससुराल जा रहे दो युवकों की बाइक अनियंत्रित होकर गड्ढे युक्त झाड़ियों में जा गीरी। जिससे दोनों को गंभीर चोटें आई रात के अंधेरे और जंगल के कारण पूरी रात दोनों मदद की गुहार लगाते रहे परंतु कोई भी राहगीर या गाड़ी वाला उनके मदद को नहीं आया। उस जंगल में मोबाइल टावर भी काम नहीं करता, जिसके कारण मोबाइल होने के बावजूद हो अपने परिवार वालों से संपर्क नहीं कर पाए। आज सुबह करीब 8:00 बजे कुछ राहगीर उधर से जा रहे थे कुछ लोगों का रोता हुआ आवाज सुनकर झाड़ियो के पास गए, जहां उन्हें दो लोग घायल अवस्था में रोते बिलखते मिले। तत्काल उन्होंने राहत पहुंचाने हेतु उनसे उनका घर का पता पूछा और मोबाइल नंबर लेकर कुछ आगे जाकर उनके परिवार वालों से संपर्क कर इस घटना की सूचना दी। सूचना पाने के तुरंत बाद परिवार वाले एंबुलेंस लेकर वहां पहुंचे तथा दोनों घायलों को उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी लेकर पहुंचे। जहां मौजूद चिकित्सक डॉ विनोद सिंह ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए प्राथमिक इलाज करने के बाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। दोनों घायलों की पहचान राजन पनिका उम्र करीब 27 वर्ष पुत्र राजदेव पानी का तथा शिवम पटेल उम्र करीब 22 वर्ष पुत्र अरविंद पटेल दोनों निवासी रजखड़ गांव के रूप में हुआ। घटना के बाबत बताया गया कि राजन पनिका रात को अपने ससुराल कोटा जा रहा था। इस दौरान राजन ने अपने दोस्त शिवम पटेल को भी साथ में ले लिया और दोनों पल्सर बाइक से कोटा जाने लगे तभी हाथी नाला के जंगल में दोनों की बाइक अनियंत्रित होकर गड्ढा युक्त झाड़ियां में जा गिरा। जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए दोनों घायलों ने बताया कि रात भर हम दोनों अपने मदद के लिए आने जाने वाले गाड़ियों राहगीरों को आवाज देते रह गए, परंतु कोई भी हमारी मदद को नहीं आया। रात भर हम दोनों इतने ठंडे में दर्द से रोते रहे परंतु कोई भी नहीं आया। यहां पर मोबाइल टावर भी नहीं काम कर रहा था। जिससे अपने घर वालों को मदद के लिए बुला ले, हम लोग को तो लगा कि दर्द के मारे हम दोनों की जान चल जाएगी। बता दें कि दुद्धी से हाथी नाला के बीच करीब 18 किलोमीटर मोबाइल का कोई भी नेटवर्क काम नहीं करता, जिसके कारण कई हद से होने के बाद कइयों की जान जा चुकी है। अभी कुछ वर्ष पूर्व एक दरोगा का भी इस जंगल में एक्सीडेंट हुआ था मोबाइल टावर ना होने के वजह से और समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी जान चली गई थी। लोगों ने इस जंगल में मोबाइल नेटवर्क की व्यवस्था करने की मांग की है ताकि कभी भी किसी भी अपरिहर कारणों से किसी की मौत ना हो सके और कुछ घटनाएं घटने से पहले मोबाइल के माध्यम से जानकारी मिल जाए।



