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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news lakhs were spent in the name of beautification in obra lights were switched off and fountains also dried up questions raised on maintenance

Sonbhadra News: ओबरा में सुंदरीकरण के नाम पर लाखों खर्च, लाइटें बंद तो फव्वारे भी सूखे; रखरखाव पर उठे सवाल.

ओबरा के प्रमुख चौराहों के सुंदरीकरण पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद लाइटें और फव्वारे बंद पड़े हैं। गजराज नगर, शारदा मंदिर, डिग्री कॉलेज और गेस्ट हाउस चौराहे की व्यवस्थाओं के रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बंद लाइटों और फव्वारों को जल्द चालू कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों से निरीक्षण की मांग की है।

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7:15 PM, Oct 8, 2026

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Sonbhadra News: ओबरा में सुंदरीकरण के नाम पर लाखों खर्च, लाइटें बंद तो फव्वारे भी सूखे; रखरखाव पर उठे सवाल.
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ओबरा में बंद फव्वारों की रात की तस्वीर, लाइटें जलने के बावजूद पानी न होने से सुंदरीकरण की व्यवस्था पर सवाल उठते दिखे।

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Story By: विकास कुमार हलचल, ओबरा।

शहर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए सरकारी धन से लाखों रुपये खर्च कर चौराहों का सुंदरीकरण कराया गया, आकर्षक लाइटें लगाई गईं और फव्वारे तैयार किए गए। लेकिन अब यही व्यवस्थाएं अपनी बदहाली की कहानी बयां करती नजर आ रही हैं। कहीं लाइटें बंद हैं तो कहीं फव्वारों से पानी की धार गायब है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सुंदरीकरण के नाम पर खर्च किया गया सरकारी धन जनता को कितना लाभ दे रहा है? दरअसल नगर पंचायत ओबरा क्षेत्र के गजराज नगर तिराहा, शारदा मंदिर चौराहा, डिग्री कॉलेज चौराहा और गेस्ट हाउस चौराहे पर सुंदरीकरण के तहत लगाए गए लाइटिंग सिस्टम और फव्वारे वर्तमान में बंद पड़े दिखाई दे रहे हैं। जिन चौराहों को रोशनी और फव्वारों से आकर्षक बनाने की योजना रही होगी, वहां अब व्यवस्थाएं खुद ही रखरखाव की तलाश करती नजर आ रही हैं। मामला सिर्फ लाइट और फव्वारे बंद होने तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि क्या सुंदरीकरण का काम केवल निर्माण और उद्घाटन तक ही सीमित है? निर्माण के बाद इन व्यवस्थाओं को चालू रखने और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? क्या संबंधित अधिकारियों की ओर से समय-समय पर इनका निरीक्षण किया जाता है? यदि निरीक्षण होता है तो लंबे समय से बंद पड़ी व्यवस्थाओं को ठीक कराने की पहल क्यों नहीं दिखाई दे रही? विडंबना यह है कि जिन फव्वारों में पानी की धार से चौराहों की खूबसूरती बढ़नी चाहिए, वे पानी के इंतजार में हैं और जिन लाइटों से रात में शहर जगमगाना चाहिए, वे खुद रोशनी की तलाश में नजर आ रही हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि सुंदरीकरण के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी कहीं कागजों में तो नहीं रह गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी धन जनता की सुविधा और शहर के विकास के लिए खर्च होता है। इसलिए निर्माण के साथ उसके रखरखाव और नियमित संचालन की व्यवस्था भी जरूरी है। लोगों ने बंद पड़ी लाइटों और फव्वारों को जल्द चालू कराने तथा संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन व्यवस्थाओं का संज्ञान लेकर उन्हें कब दुरुस्त कराते हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ चौराहों की खूबसूरती का नहीं, बल्कि सरकारी धन से तैयार की गई सुविधाओं के वास्तविक उपयोग और रखरखाव का भी है।


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