Sonbhadra News: अवैध अस्पताल की कथित लापरवाही ने छीनी मां और नवजात की सांसें.
सोनभद्र जिला मुख्यालय स्थित एक कथित अवैध निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा और नवजात की मौत से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और मामले को दबाने का आरोप लगाया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
sonbhadra
7:45 PM, Jul 10, 2026
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कथित लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों का विलाप, मौके पर जुटी भीड़ और सील किया गया सिंह हेल्थ केयर अस्पताल।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।
सोनभद्र।
जिला मुख्यालय पर कथित रूप से बिना वैध पंजीकरण संचालित निजी अस्पतालों की लापरवाही एक बार फिर एक परिवार पर भारी पड़ गई। उरमौरा स्थित सिंह हेल्थ केयर में प्रसव के दौरान कथित चिकित्सीय लापरवाही से 32 वर्षीय मीना देवी और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। इस घटना ने न केवल एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं, बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, पन्नूगंज थाना क्षेत्र के बेलखुरी गांव निवासी राजेश अपनी पत्नी मीना देवी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल के बाहर सक्रिय कथित दलालों ने उन्हें बहला-फुसलाकर उरमौरा स्थित सिंह हेल्थ केयर में भर्ती करा दिया। यहां ऑपरेशन के बाद मृत शिशु का जन्म हुआ और कुछ ही देर बाद प्रसूता की हालत भी बिगड़ गई। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मीना देवी को गंभीर हालत बताकर वाराणसी रेफर कर दिया।
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लेकिन वाराणसी पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही मृतका के परिजन अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक अस्पताल का डॉक्टर और पूरा स्टाफ ताला लगाकर फरार हो चुका था। घटना के बाद मौके पर पुलिस पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था संभाली। निजी अस्पताल पंजीयन के नोडल अधिकारी डॉ. गुलाब शंकर यादव ने अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि सिंह हेल्थ केयर कथित रूप से अवैध रूप से संचालित हो रहा था। जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल को सीज कर संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है तथा आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। मृतका के परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और जिला अस्पताल के बाहर सक्रिय कथित दलालों के नेटवर्क पर सख्ती की मांग की है। वहीं, यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर बिना मानकों वाले अस्पताल लंबे समय तक कैसे संचालित होते रहे।
