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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news mine officer and crusher organization president face to face brainstorming took place on the problems of businessmen

Sonbhadra News: खान अधिकारी और क्रेशर संगठन अध्यक्ष आमने-सामने, कारोबारियों की समस्याओं पर हुआ मंथन.

क्रेशर संगठन अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने ज्येष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप के सामने कारोबारियों की समस्याएं रखीं। रवन्ना, बिजली कटौती, विभागीय जांच, चोरी और खनन पट्टे से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा। अध्यक्ष ने नियमों में राहत और समस्याओं के समाधान की मांग की।

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3:17 PM, Sep 23, 2026

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Sonbhadra News: खान अधिकारी और क्रेशर संगठन अध्यक्ष आमने-सामने, कारोबारियों की समस्याओं पर हुआ मंथन.
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क्रेशर संगठन की बैठक में ज्येष्ठ खान अधिकारी की मौजूदगी में कारोबारियों ने रखीं अपनी समस्याएं।

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Story By: आर. एन. पाण्डेय।

सोनभद्र की पहचान प्रदेश के प्रमुख खनन क्षेत्रों में होती है और यहां क्रेशर उद्योग से हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। हालांकि खनन नीति, विभागीय कार्रवाई, बिजली की समस्या और मौसम के कारण क्रेशर कारोबारियों को लगातार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं समस्याओं के समाधान को लेकर बुधवार को ओबरा स्थित क्रेशर एसोसिएशनस कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में ज्येष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप की मौजूदगी में संगठन के पदाधिकारियों और क्रेशर संचालकों ने अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। बैठक में कारोबारियों ने कहा कि बार-बार बिजली ट्रिपिंग और विद्युत आपूर्ति बाधित होने से क्रेशर प्लांटों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिजली के स्थान पर बैकअप चलाने और मशीनें बार-बार बंद होने से उत्पादन प्रभावित होता है और तैयार माल की लागत बढ़ती है। संगठन ने मांग की कि विद्युत ट्रिपिंग और कटौती पर प्रभावी रोक लगाई जाए। जब तक निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होती, तब तक न्यूनतम डिमांड/मिनिमम चार्ज में राहत देने की व्यवस्था की जाए। क्रेशर संचालकों ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग समेत विभिन्न विभागों की जांच और कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि रोजाना किसी न किसी विभाग की कार्रवाई से कारोबार प्रभावित होता है। संगठन ने नियमों के तहत जांच किए जाने के साथ अनावश्यक उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की। बैठक में क्रेशर प्लांटों पर चोरी की घटनाओं का मामला भी उठा। संगठन ने चोरी रोकने के लिए विशेष टीम गठित किए जाने की मांग की। इसके अलावा खदानों के टेंडर होने और खनन शुरू होने के बाद सुरक्षा निदेशालय से अनुमति मिलने में होने वाली देरी पर भी चर्चा हुई। कारोबारियों ने कहा कि टेंडर जनहित में खनन के लिए दिए जाते हैं, ऐसे में अनुमति की प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए। काश्तकारी पट्टों को लेकर भी संगठन ने अपना पक्ष रखा। मांग की गई कि काश्तकारी पट्टों के लिए निश्चित दर निर्धारित कर काश्तकार को ही खनन पट्टा स्वीकृत करने की व्यवस्था की जाए। जैसा पूर्व में होता आया है। एसोसिएशन अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने गिट्टी की ढुलाई में रावन्ना संबंधी शिकायत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्रेशर प्लांट से बिना रावन्ना गिट्टी भेजी जाती है तो ऐसे प्लांटों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सीसीटीवी के माध्यम से वाहन और रावन्ना की जांच किए जाने का सुझाव दिया, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। अगर कोई नियम के विरूध जाता है तो उसके खिलाफ आर्थिक दंड लगाया जाये। बैठक में ई-टेंडरिंग व्यवस्था के कारण छोटे कारोबारियों को खदानों के टेंडर मिलने में आ रही परेशानी पर भी चर्चा हुई। कारोबारियों का कहना था कि बड़े व्यापारियों के पास अपने खदान और प्लांट होने से उन्हें प्रतिस्पर्धा में अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जबकि छोटे कारोबारियों के सामने कारोबार और रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है। संगठन ने ज्येष्ठ खान अधिकारी के सामने सभी समस्याएं रखते हुए शासन-प्रशासन से समाधान की मांग की। अब कारोबारियों की निगाहें इस बात पर हैं कि खनन विभाग इन समस्याओं के समाधान के लिए नियमों और प्रक्रियाओं में क्या बदलाव करता है। बैठक में यह भी चर्चा रही कि नियम सभी कारोबारियों पर समान रूप से लागू हों, ताकि प्रतिस्पर्धा में पारदर्शिता बनी रहे और सरकार के राजस्व को भी नुकसान न पहुंचे।


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