Sonbhadra News: सोन नदी त्रासदी पर भावुक हुए मंत्री, कहा- मानव क्षति की भरपाई संभव नहीं.
चोपन थाना क्षेत्र के मीतापुर स्थित सोन नदी में डूबने से तीन किशोरों की मौत की आशंका से क्षेत्र में शोक है।घटना की जानकारी मिलते ही समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और हर संभव सहायता का भरोसा दिया। मंत्री ने कहा कि मानव क्षति की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन सरकार परिवारों के साथ खड़ी है।
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5:40 PM, Jun 24, 2026
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सोन नदी में डूबे तीन किशोरों की तलाश में जुटी एसडीआरएफ टीम, घटनास्थल पर मौजूद मंत्री संजीव कुमार गोंड और ग्रामीण।
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Story By: चंदन कुमार, चोपन।
सोनभद्र।
चोपन थाना क्षेत्र के मीतापुर ग्राम पंचायत में सोन नदी में नहाने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। नदी में डूबने से तीन किशोरों की मौत की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीम ने तलाश अभियान शुरू कर दिया है। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
सोन नदी हादसे के बाद समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड घटनास्थल पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत की भरपाई कोई नहीं कर सकता, लेकिन सरकार परिवार के साथ खड़ी है। फिलहाल पूरे इलाके में शोक का माहौल है और प्रशासन लोगों से सतर्कता बरतने की अपील कर रहा है। वही निषाद समुदाय ने पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा और अवैध खनन की वजह से हुए हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सजा का मांग की है।
वही घटनास्थल पर मौजूद एडिशनल एसपी अनिल कुमार ने बताया चोपन थाना क्षेत्र के मीतापुर में सोन नदी में नहाने के दौरान तीन किशोर डूब गए। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। एएसपी अनिल कुमार ने बताया कि तीनों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बच्चे गहरे पानी में जाने के कारण डूबे हैं।
साथ ही उन्होंने पुलिस द्वारा किसी को दौड़ाने या धक्का देने की बात को अफवाह बताते हुए खारिज किया। एएसपी ने कहा कि लोगों को नदी और गहरे जलाशयों के आसपास विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा जितनी भी डैम नदियां और जहां-जहां लोग नहाते हैं वहां पर खतरा होने की संभावना है ऐसी जगह को चिन्हित करके चेतावनी बोर्ड लगवाई जा रही है, जिससे डूबने की जो घटना है उसको न्यूनतम किया जाए।
अपर जिलाधिकारी बागेश शुक्ला ने बताया कि सुबह तीन बच्चों के डूबने की सूचना मिलने के बाद स्थानीय गोताखोरों को लगाया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद एसडीआरएफ टीम को बुलाकर व्यापक खोज अभियान शुरू कराया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता बच्चों को जल्द से जल्द खोज निकालना है। एडीएम ने बताया कि आपदा राहत निधि के तहत मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही घटना के कारणों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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घटना की सूचना मिलते ही समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ परिवारों की मदद करेगी। घटना को लेकर हो रही राजनीति पर उन्होंने नाराजगी भी जताई।
मंत्री ने कहा कि दुःख की इस घड़ी में राजनीति नहीं बल्कि पीड़ितों की मदद प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में कोई भी दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सुभाषपा पिछड़ा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष जितेंद्र निषाद ने तीन बच्चों की मौत के लिए अवैध बालू खनन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बड़ी मशीनों से खनन के कारण नदी में गहरे गड्ढे और दलदल बन गए हैं।
निषाद समाज पिछले तीन महीनों से अवैध खनन के खिलाफ लगातार ज्ञापन देता रहा है। लेकिन कुछ नहीं हुआ नतीजन आज संभावित अंदेशा हादसे में तब्दील हो गईं। उनका आरोप है कि इसी दलदली क्षेत्र में फंसने से तीन बच्चों की दर्दनाक मौत हुई। उन्होंने प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सोन नदी हादसे के बाद निषाद समाज के नेता रोहित कुमार बिंद ने अवैध खनन को घटना का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों से प्रशासन को कई बार ज्ञापन देकर अवैध खनन की शिकायत की गई थी। रोहित बिंद ने आरोप लगाया कि बड़ी-बड़ी मशीनों से नदी में लगातार बालू का खनन किया जा रहा है। उनका कहना है कि खनन के कारण नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हुई और गहरे गड्ढे बन गए।
उन्होंने बताया कि निषाद समाज के लोग मछली पकड़ने और खेती के लिए नदी पर निर्भर हैं। रोहित बिंद ने आरोप लगाया कि खनन माफियाओं द्वारा नदी के कुछ हिस्सों को बांध दिया गया है। उन्होंने कहा कि समाज की शिकायतों को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष कई बार उठाया गया। उनका दावा है कि हादसे के काफी समय बाद तक कोई जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा था।
रोहित बिंद ने कहा कि इस घटना से पूरा निषाद समाज दुखी और आक्रोशित है। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की।



