Sonbhadra News: सीआईएसएफ-डीएफआई के बीच एमओयू, ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमता को मिलेगी मजबूती.
सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीच एमओयू से ड्रोन व एंटी-ड्रोन सुरक्षा क्षमता को मजबूती मिलेगी। समझौते के तहत प्रशिक्षण, काउंटर-ड्रोन तकनीक, फोरेंसिक जांच और संयुक्त अभ्यास को बढ़ावा दिया जाएगा। आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन व काउंटर-ड्रोन सिस्टम के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा।
sonbhadra
2:10 PM, Sep 13, 2026
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सीआईएसएफ और डीएफआई के बीच एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान मौजूद सीआईएसएफ व डीएफआई के पदाधिकारी।
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Story By: नीरज गुप्ता, बीजपुर।
सोनभद्र।
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देश के महत्वपूर्ण ठिकानों को हवाई खतरों से बचाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के बीच एक समझौता हुआ है। CISF के उप कमांडेंट प्रकाश ने बताया कि इससे ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक में सुरक्षा क्षमताएं मजबूत होंगी। CISF मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में CISF की ओर से डीआईजी डॉ. सीडी नायक और DFI अध्यक्ष स्मित शाह ने समझौते पर साइन किए। इस मौके पर CISF महानिदेशक प्रवीर रंजन और दोनों संगठनों के कई बड़े अधिकारी मौजूद थे। CISF अभी देश के 370 से ज्यादा महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा कर रहा है। इनमें एयरपोर्ट, परमाणु प्लांट, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरी जैसे बेहद संवेदनशील ठिकाने शामिल हैं। हवाई खतरों से इन ठिकानों को बचाने की जिम्मेदारी भी CISF को दी गई है। ड्रोन तकनीक के तेजी से बढ़ने और इससे होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए, संदिग्ध ड्रोनों की पहचान, निगरानी, ट्रैकिंग और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता बढ़ाना जरूरी है। CISF ने अपनी सुरक्षा में ड्रोन तकनीक को शामिल किया है। अब तक 3 हजार से ज्यादा जवानों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। करीब 80 यूनिट निगरानी, खतरे की पहचान और ट्रेनिंग के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। इस समझौते के तहत आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाया जाएगा। DFI भारतीय ड्रोन स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर CISF की क्षमता बढ़ाने, रिसर्च करने और ऑपरेशन की तैयारी मजबूत करने में मदद करेगा। समझौते के तहत, महत्वपूर्ण ठिकानों पर एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने के लिए SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर), डिप्लॉयमेंट फ्रेमवर्क और पायलट प्रोजेक्ट बनाए जाएंगे। संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की जांच और घटना के बाद आकलन के लिए स्वदेशी फोरेंसिक उपकरण बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। ड्रोन घुसपैठ की पहचान, ट्रैकिंग और जवाबी कार्रवाई की तैयारी जांचने के लिए संयुक्त अभ्यास और रेड-टीमिंग ड्रिल भी होंगी। सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि यह साझेदारी बदलते ड्रोन खतरों के खिलाफ सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने में अहम साबित होगी। वहीं डीएफआई अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि भारतीय ड्रोन उद्योग स्वदेशी तकनीकी नवाचारों के माध्यम से सीआईएसएफ की जरूरतों को पूरा करने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए आत्मनिर्भर सुरक्षा ढांचा तैयार करने में सहयोग करेगा।



