Sonbhadra News: लोकायुक्त जांच में घिरी नगर पंचायत, अभिलेख नहीं मिलने पर अधिकारियों की नाराजगी, संस्कार भवन का ताला तुड़वाकर किया निरीक्षण.
लोकायुक्त के निर्देश पर अपर आयुक्त समेत अधिकारियों की टीम ने सोनभद्र के आदर्श नगर पंचायत चोपन में भवन नंबरिंग शुल्क और संस्कार भवन प्रकरण की जांच की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं होने पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई। टीम ने संस्कार भवन का ताला तुड़वाकर निरीक्षण किया और भवन की जर्जर स्थिति का जायजा लिया। अधिशासी अधिकारी को समस्त मूल अभिलेखों के साथ मिर्जापुर तलब किया गया है।
sonbhadra
6:09 PM, Aug 5, 2026
Share:


लोकायुक्त जांच टीम ने चोपन नगर पंचायत कार्यालय में अभिलेखों की जांच की, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी और दस्तावेज तलब किए।
Daily ख़बरों के लिए फ़ॉलो करें
Story By: चंदन कुमार, चोपन।
सोनभद्र।
चोपन पहुंची लोकायुक्त की जांच टीम-
सोनभद्र के आदर्श नगर पंचायत चोपन में भवन नंबरिंग शुल्क, संस्कार भवन और जनसूचना (आरटीआई) से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश लोकायुक्त की जांच तेज हो गई है। लोकायुक्त के निर्देश पर अपर आयुक्त मिर्जापुर, संयुक्त निदेशक (जेसीडी) तथा कोषागार एवं वित्त विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम मंगलवार को नगर पंचायत कार्यालय और काली मंदिर परिसर स्थित संस्कार भवन का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंची। अधिकारियों ने शिकायत से जुड़े मामलों की बिंदुवार जांच शुरू की।
महत्वपूर्ण अभिलेख नहीं मिलने पर जताई नाराजगी-
जांच टीम ने सबसे पहले नगर पंचायत कार्यालय में भवन नंबरिंग शुल्क, संस्कार भवन और जनसूचना से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया। शिकायत में जिन दस्तावेजों और पत्रावलियों का उल्लेख किया गया था, उनमें से कई रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इस पर अधिकारियों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह से स्पष्टीकरण मांगा और सभी मूल पत्रावलियों के साथ अगले दिन मिर्जापुर कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने कहा कि जांच उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाएगी।
संस्कार भवन का ताला तुड़वाकर किया निरीक्षण-
कार्यालय निरीक्षण के बाद जांच टीम काली मंदिर परिसर स्थित संस्कार भवन पहुंची। भवन लंबे समय से बंद होने के कारण उसकी चाबी मौके पर उपलब्ध नहीं हो सकी। काफी देर तक तलाश के बाद कर्मचारियों ने ताला तोड़कर भवन का दरवाजा खोला। अधिकारियों ने भवन के कमरों, दीवारों, छत और अन्य हिस्सों का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छत से पानी टपकने, दीवारों में नमी और भवन के जर्जर होने की स्थिति सामने आई। अधिकारियों ने स्वयं छत पर चढ़कर स्थिति का जायजा लिया और भवन के रखरखाव की जानकारी भी ली।
14.70 लाख के टेंडर पर उठे सवाल-
निरीक्षण के दौरान अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि संस्कार भवन की छत की मरम्मत के लिए लगभग 14.70 लाख रुपये का टेंडर प्रस्तावित किया गया है। इस पर मौके पर मौजूद शिकायतकर्ता और कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि भवन की पूरी संरचना जर्जर है तो केवल छत की मरम्मत पर इतनी बड़ी राशि खर्च करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी मरम्मत के नाम पर सरकारी धन खर्च किया गया, लेकिन भवन की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
भवन नंबरिंग शुल्क और आरटीआई को लेकर शिकायत-
विज्ञापन
मामले के शिकायतकर्ता संजय कुमार जैन ने लोकायुक्त को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि नगर पंचायत द्वारा भवन नंबरिंग के नाम पर प्रति भवन 80 रुपये की वसूली की गई, जबकि इसके लिए किसी अधिनियम, नियमावली या शासनादेश का स्पष्ट आधार नहीं बताया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनसुनवाई पोर्टल पर अलग-अलग समय पर विरोधाभासी उत्तर दिए गए तथा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गईं।
संस्कार भवन निर्माण और रखरखाव पर सवाल-
शिकायत में वर्ष 2010-11 में निर्मित संस्कार भवन का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भवन वर्ष 2017 से बंद पड़ा है और उसकी स्थिति को लेकर विभाग द्वारा अलग-अलग समय पर अलग-अलग कारण बताए गए। कभी धनाभाव तो कभी छत क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई, जबकि बाद में भवन के जीर्णोद्धार के लिए 14.70 लाख रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने भवन की जर्जर स्थिति को खदानों की ब्लास्टिंग से जोड़ने के दावे पर भी सवाल उठाए और निर्माण कार्य, ठेका प्रक्रिया, भुगतान तथा रखरखाव में अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।
जेई की कार्यप्रणाली पर भी स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल-
जांच के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत के कनिष्ठ अभियंता (जेई) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि संबंधित जेई लंबे समय से नगर पंचायत का कार्य देख रहे हैं, जिससे ठेकेदारों के साथ मिलीभगत की आशंका पैदा होती है। लोगों का कहना है कि घटिया गुणवत्ता वाले कार्यों को भी माप पुस्तिका (एमबी) जारी कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है। उन्होंने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए नगर पंचायत में नए जेई की नियुक्ति की मांग भी की।
अधिकारियों ने जांच पूरी होने तक टिप्पणी से किया इनकार-
निरीक्षण के बाद जांच टीम के अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पूरे मामले का विस्तृत परीक्षण और अभिलेखों के अध्ययन के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। उन्होंने कहा कि "अभी जांच जारी है, इसलिए इस समय किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। सभी तथ्यों और दस्तावेजों का आकलन करने के बाद ही रिपोर्ट तैयार की जाएगी।" अधिकारियों ने बताया कि नगर पंचायत के अनुसार संस्कार भवन वर्ष 2021 तक उपयोग में था, जिसके बाद भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण उसका संचालन बंद कर दिया गया। वर्तमान में भवन की मरम्मत कराने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, इतने कम समय में भवन के क्षतिग्रस्त होने संबंधी सवाल पर अधिकारियों ने कहा कि यह पूरी तरह तकनीकी विषय है और इस संबंध में अंतिम राय तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद ही दी जा सकती है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई-
लोकायुक्त कार्यालय पहले ही शिकायत को प्रथम दृष्टया विचारणीय मानते हुए मंडलायुक्त मिर्जापुर के माध्यम से विस्तृत जांच कराने के निर्देश दे चुका है। जांच समिति को शिकायतकर्ता का पक्ष सुनने और निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। फिलहाल जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
