Sonbhadra News: बभनी के 125 परिषदीय विद्यालयों में मनाया गया राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, 15 हजार बच्चों को खिलाई गई दवा.
बभनी ब्लॉक के 125 परिषदीय विद्यालयों में सोमवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। अभियान के तहत करीब 15 हजार बच्चों को उम्र के अनुसार एल्बेंडाजोल की कृमिनाशक दवा खिलाई गई। बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाव, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। शिक्षकों ने हाथों की सफाई, साफ पानी और स्वच्छ भोजन की आदत अपनाने की सलाह दी। छूटे बच्चों को मॉप-अप दिवस पर दवा खिलाई जाएगी।
sonbhadra
9:28 PM, Aug 10, 2026
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बभनी के परिषदीय विद्यालय में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के दौरान बच्चों को एल्बेंडाजोल की कृमिनाशक दवा खिलाते शिक्षक।
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Story By: चंद्रशेखर पाण्डेय, बभनी।
सोनभद्र।
बभनी ब्लॉक के परिषदीय विद्यालयों में सोमवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। शासन के निर्देश पर 125 स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाव, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। 'कृमि मुक्त बच्चा, स्वस्थ बच्चा' का संदेश देते हुए लगभग 15 हजार बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार एल्बेंडाजोल की कृमिनाशक दवा खिलाई गई। यह अभियान स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से चलाया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पेट के कीड़ों से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से सुरक्षित रखना और उनमें बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना था। शिक्षकों ने बताया कि कृमि संक्रमण से बच्चों में भूख में कमी, कमजोरी, कुपोषण, एनीमिया और शारीरिक-मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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शिक्षकों ने कृमि संक्रमण से बचाव के लिए समय-समय पर कृमिनाशक दवा के सेवन के साथ-साथ हाथों की स्वच्छता, साफ पानी का सेवन, नाखूनों की नियमित सफाई और स्वच्छ भोजन की आदतों को अपनाने की सलाह दी। विद्यालय परिवार ने बच्चों से स्वच्छता को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। बभनी ब्लॉक के परिषदीय विद्यालयों में विश्व कृमि दिवस के अवसर पर बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा (एल्बेंडाजोल) खिलाई गई। स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से बचाना और उनके शारीरिक व मानसिक विकास को बेहतर बनाना है। इस अभियान का लक्ष्य 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों और किशोर-किशोरियों को दवा खिलाना था। 6 से 14 वर्ष के बच्चों को एक पूरी गोली चबाकर खानी होती है। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसे खाली पेट नहीं बल्कि कुछ खाने के बाद ही खिलाया जाता है। जो बच्चे किसी कारणवश दवा खाने से छूट गए हैं, उन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित मॉप-अप दिवस पर दोबारा मौका देकर दवा दी जाएगी।
