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Sonbhadra News: पैसों के लिए नवजात को रोका! मां जिंदगी और मौत से जूझती रही, निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप.

दुद्धी कस्बे स्थित एक निजी अस्पताल पर नवजात बच्चे को अतिरिक्त रुपये की मांग को लेकर रोकने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित पिता का कहना है कि उसकी पत्नी की हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल ने कथित रूप से करीब दो घंटे तक बच्चे को नहीं सौंपा। मामले में शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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9:14 PM, Jul 9, 2026

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Sonbhadra News: पैसों के लिए नवजात को रोका! मां जिंदगी और मौत से जूझती रही, निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप.
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शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।

दुद्धी कस्बे के रामनगर स्थित सर्वे ऑफिस के बगल में संचालित एक निजी अस्पताल एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस बार अस्पताल पर मानवता को शर्मसार करने वाला आरोप लगा है। फुलवार गांव निवासी कमलेश यादव का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बकाया और अतिरिक्त रुपये की मांग को लेकर उसके नवजात बच्चे को करीब डेढ़ से दो घंटे तक अपने पास रोके रखा, जबकि उसकी पत्नी की हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया जा चुका था। पीड़ित कमलेश यादव ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले उसकी पत्नी चंदा ने म्योरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद एक नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसके चलते उसे इलाज के लिए दुद्धी के रामनगर स्थित हर्षित हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती के समय पांच हजार रुपये जमा कराए गए और इलाज शुरू किया गया। कमलेश के अनुसार, बुधवार को उसकी पत्नी की अचानक तबीयत बिगड़ गई और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। पत्नी को लेकर जिला अस्पताल रवाना होने से पहले जब वह निजी अस्पताल से अपना नवजात लेने पहुंचा तो अस्पताल प्रबंधन ने कथित तौर पर अतिरिक्त दो हजार रुपये की मांग करते हुए बच्चे को देने से इनकार कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि उसने अस्पताल कर्मियों से पत्नी की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए कई बार बच्चे को देने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। करीब डेढ़ से दो घंटे तक नवजात को अस्पताल में रोके रखा गया। बाद में फुलवार गांव के प्रधान दिनेश यादव के हस्तक्षेप और अस्पताल प्रबंधन से बातचीत के बाद नवजात को परिजनों के सुपुर्द किया गया। इसके बाद परिवार मां और बच्चे को लेकर एंबुलेंस से जिला अस्पताल रवाना हुआ। कमलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल एक दिन के इलाज के लिए 3500 रुपये तक वसूल रहा था। उनका कहना है कि पहले से पांच हजार रुपये जमा होने के बावजूद अतिरिक्त धन की मांग की गई और इलाज के बाद भी बच्चे की स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। ग्राम प्रधान दिनेश यादव ने भी पीड़ित परिवार के आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा कि अस्पताल को मरीज की गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। उनका कहना था कि जब मां की हालत नाजुक थी, उस समय नवजात को पैसों के विवाद में रोकना बेहद अमानवीय कदम है। वहीं, एडिशनल सीएमओ एवं नोडल अधिकारी गुलाब शंकर यादव ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया था। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने पर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित अस्पताल और चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


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