Sonbhadra News: तीन माह से वेतन न मिलने पर एनएचएम कर्मियों का कार्य बहिष्कार, जिला अस्पताल लोढ़ी में सेवाएं प्रभावित.
तीन माह से मानदेय न मिलने के विरोध में एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने गुरुवार को कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र शुक्ला ने बताया कि पिछले एक वर्ष से वेतन भुगतान अनियमित है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि मकान किराया, बच्चों की फीस और घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
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5:11 PM, May 21, 2026
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कार्य बहिष्कार के दौरान मुख्यमंत्री से शीघ्र मानदेय भुगतान कराने की मांग।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।
सोनभद्र।
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तीन माह से मानदेय भुगतान न होने से नाराज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों ने गुरुवार को कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। कार्य बहिष्कार का असर जिला अस्पताल लोढ़ी समेत विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर देखने को मिला। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष से वेतन भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और समय पर मानदेय नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ, सोनभद्र के जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र शुक्ला ने बताया कि यह आंदोलन प्रदेशव्यापी कार्यक्रम का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारियों को पिछले लगभग तीन माह से वेतन नहीं मिला है। पिछले एक वर्ष से लगातार दो-दो और तीन-तीन महीने के अंतराल पर केवल एक माह का वेतन जारी किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि एनएचएम के लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारी 10 से 15 हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्य करते हैं। इतनी कम आय में परिवार का खर्च चलाना पहले ही मुश्किल होता है, वहीं तीन माह तक वेतन न मिलने से मकान किराया, दूध, बच्चों की फीस और अन्य घरेलू खर्चों का भुगतान करना कठिन हो गया है। इस संबंध में 11 मई को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और न ही शासन स्तर से बजट उपलब्ध कराया गया है। कार्य बहिष्कार में शामिल एक महिला संविदाकर्मी ने बताया कि तीन महीने से वेतन न मिलने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया और दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। सरकारी कर्मचारियों को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन संविदा कर्मचारियों के लिए वेतन ही एकमात्र सहारा है और वह भी समय पर नहीं मिल रहा। महिला कर्मी ने कहा कि संविदा नर्सें और स्वास्थ्यकर्मी 24 घंटे मरीजों और नवजात शिशुओं की सेवा में लगे रहते हैं। वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ दूसरों के बच्चों और मरीजों की देखभाल करते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अपने परिवार और बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से शीघ्र मानदेय जारी कराने की मांग की ताकि कर्मचारी बिना किसी आर्थिक चिंता के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे असर को देखते हुए मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
