Sonbhadra News: बभनी में योग शिविर के दसवें दिन प्राणायाम और ओंकार जप का महत्व बताया.
बभनी में 25 दिवसीय योग शिविर के दसवें दिन वैदिक सत्र का आयोजन हुआ। स्वामी योगा प्रसाद ने प्राणायाम, ओंकार जप और आत्मचिंतन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्ञान, वैराग्य और नियमित अभ्यास से मन की शुद्धि के साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।
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3:49 PM, Oct 1, 2026
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बभनी में आयोजित 25 दिवसीय योग शिविर के दसवें दिन वैदिक सत्र में साधकों को योग एवं प्राणायाम का अभ्यास कराते स्वामी योगा प्रसाद।
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Story By: चंद्रशेखर पाण्डेय, बभनी।
सोनभद्र।
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बभनी में 25 दिवसीय योग शिविर के दसवें दिन स्वामी योगा प्रसाद ने वैदिक सत्र में बताया कि प्राणायाम से मन शुद्ध होता है। ओंकार जप से आत्मा की शुद्धि और ज्ञान-वैराग्य से मुक्ति का मार्ग मिलता है। स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य पांच इंद्रियों के भोग में उलझा रहता है। ओंकार जप और आत्म-चिंतन उसे श्रेष्ठ इंसान बनाता है। मन शुद्ध होने पर ही इस छठे कर्म में मन लगता है। योग की शुरुआत मजबूत संकल्प से होती है, जो आलस्य दूर करता है। लंबी सांसों से मन शांत होता है। भस्त्रिका प्राणायाम से दिमाग को ऑक्सीजन मिलती है, जिससे विचारों का बहाव रुकता है। मन भौतिक सुखों का आदी होने पर बीमारियां आती हैं। ज्ञान, वैराग्य और अभ्यास से स्थायी-अस्थायी का विवेक आता है। ज्ञान से मोह कटने पर वैराग्य आता है, जिससे योग सिद्ध होता है। सत्य, प्रेम व विश्वास से श्रद्धा पैदा होती है। अहंकार मुक्त जीवन ही परम आनंद से जुड़कर मुक्ति दिलाता है। इस दौरान विरेन्द्र योगी,डा हीरालाल,रविशंकर गुप्ता मिथलेश गुप्ता,राम प्रकाश पाण्डेय, अरविंद कुमार, सुनील गुप्ता, वरुण गुप्ता सहित बड़ी संख्या महिला-पुरुष उपस्थित रहे।


