Sonbhadra News: औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध, किसानों में बढ़ा आक्रोश.
करमा क्षेत्र के लोहरा, बट और तकिया मु० दरगाह गांवों में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। किसानों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर उपजाऊ जमीन अधिग्रहण रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। किसान यूनियन ने भी समर्थन देते हुए चेतावनी दी है कि जबरन अधिग्रहण हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
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3:23 PM, Mar 25, 2026
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प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी का आरोप, स्पष्ट जानकारी न मिलने से ग्रामीणों में भय का माहौल।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
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जनपद के करमा विकास खंड अंतर्गत लोहरा (गुलरहवा), बट एवं तकिया मु० दरगाह गांव में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर अधिग्रहण प्रक्रिया को रोकने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिग्रहण के लिए चिन्हित भूमि पूरी तरह उपजाऊ एवं सिंचित है, जहां धान, गेहूं और सब्जियों की खेती होती है। यह भूमि ही उनके जीवन-यापन का मुख्य साधन है और क्षेत्र के अधिकांश परिवार पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि यदि यह जमीन अधिग्रहित कर ली गई, तो हजारों परिवार बेरोजगार हो जाएंगे और उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इस मुद्दे पर किसान यूनियन पूर्वांचल के जिला अध्यक्ष राकेश कुमार भारती ने भी किसानों के साथ खड़े होकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से तैयार की गई जमीन को किसी भी पूंजीपति कंपनी को नहीं दिया जाना चाहिए। यदि विकास के नाम पर भूमि ली जाती है तो किसानों को उचित मुआवजा और पुनर्वास मिलना चाहिए, अन्यथा जबरन अधिग्रहण स्वीकार नहीं होगा। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि क्षेत्र में किसी बड़े औद्योगिक समूह द्वारा निवेश की योजना बनाई जा रही है, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्राम सभा तकिया के प्रतिनिधियों ने प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि जिलाधिकारी से संपर्क करने के बावजूद स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है, जिससे लोगों में असमंजस और भय का माहौल है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।



