Sonbhadra News: मानदेय बढ़ाने समेत पांच सूत्रीय मांगों को लेकर पंचायत सहायकों ने सौंपा ज्ञापन, 15 जून को लखनऊ कूच की चेतावनी.
पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन शाखा चोपन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पंचायत सहायकों के मानदेय में बढ़ोतरी सहित विभिन्न मांगों को उठाया है। यूनियन का कहना है कि पंचायत सहायकों को वर्तमान में मात्र ₹6000 प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में अपर्याप्त है। ज्ञापन में मानदेय बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह करने, संविदा व्यवस्था समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली लागू करने और अन्य की मांग।
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1:56 PM, Jun 1, 2026
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मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा- पंचायत सहायक।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।
सोनभद्र।
पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन शाखा चोपन ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी सोनभद्र को संबोधित ज्ञापन सौंपा। पंचायत सहायकों ने मानदेय वृद्धि, सेवा सुरक्षा, आयुष्मान कार्ड सहित पांच सूत्रीय मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 14 जून तक मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 15 जून को प्रदेशभर के पंचायत सहायक लखनऊ स्थित ईको गार्डेन में विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि पंचायत सहायक ग्राम पंचायतों में डिजिटल, प्रशासनिक और जनहित से जुड़े अनेक कार्यों का निरंतर निर्वहन कर रहे हैं। शासन की योजनाओं और डिजिटल सेवाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मात्र छह हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में बेहद कम है।
यूनियन के अंकित कुमार ने बताया कि यह प्रदेशव्यापी आंदोलन है और प्रदेश के सभी 75 जनपदों में पंचायत सहायकों द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिलाधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत सहायकों की भर्ती वर्ष 2021 में हुई थी और पिछले साढ़े चार वर्षों से वे लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उनके मानदेय में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। अंकित कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अन्य विभागों के आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाया है, लेकिन पंचायत सहायकों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने मांग की कि पंचायत सहायकों का मानदेय ग्राम विकास अधिकारी के समकक्ष 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल पंचायत की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है। ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी, ऑनलाइन सेवाएं और विभिन्न डिजिटल कार्य पंचायत सहायकों के माध्यम से संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद उनका मानदेय सबसे कम है। उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरों को प्रतिदिन 252 रुपये मजदूरी मिलती है, जबकि प्रशिक्षित पंचायत सहायकों को इससे भी कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है।
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अंकित कुमार ने सेवा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पंचायत सहायकों के लिए अब तक कोई स्पष्ट सेवा नियमावली नहीं बनाई गई है। संविदा पर कार्यरत होने के कारण उन्हें अक्सर नौकरी से हटाने की धमकियां मिलती हैं। उन्होंने सरकार से पंचायत सहायकों के लिए स्थायी सेवा व्यवस्था लागू करने तथा 62 वर्ष की आयु तक सेवा का अवसर देने की मांग की। उन्होंने बताया कि पंचायत सहायकों द्वारा गांव-गांव में आयुष्मान भारत योजना के तहत लोगों के कार्ड बनाए जा रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में भी सहयोग किया जा रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि स्वयं पंचायत सहायकों और उनके परिवारों को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इसलिए सभी पंचायत सहायकों और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़े जाने की मांग की गई है।
यूनियन ने महिला पंचायत सहायकों की समस्या भी उठाई। बताया गया कि मेरिट के आधार पर हुई नियुक्तियों में बड़ी संख्या में महिला पंचायत सहायिकाएं कार्यरत हैं। विवाह के बाद उनके स्थानांतरण या समायोजन की कोई नीति नहीं होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सरकार से महिला पंचायत सहायकों के लिए स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी के रिक्त पदों पर होने वाली भर्तियों में पंचायत सहायकों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की भी मांग की गई है। अंकित कुमार ने कहा कि पंचायत सहायकों ने शासन को 14 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। यदि 14 जून तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 15 जून को प्रदेशभर के पंचायत सहायक लखनऊ के ईको गार्डेन पहुंचकर विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे और अपनी आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने कहा कि पंचायत सहायक अब अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा।
