Sonbhadra News: एसआईआर का फार्म 7 मिलने से हड़कम्प, 14 नाम काटने के लिए वैरिफिकेशन के लिए पहुंचा बीएलओ.
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने का गंभीर मामला सामने आया है। सदर विधानसभा के पूर्व मोहाल और दलित बस्ती क्षेत्र में फॉर्म 7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम सूची से कटवाने का प्रयास किया गया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक आपत्ति की शिकायत पर बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों के साथ स्थलीय निरीक्षण
sonbhadra
12:57 PM, Feb 4, 2026
Share:


राबर्ट्सगंज के वार्ड नंबर एक पूरब मोहाल के भाग संख्या 14 बूथ का है मामला।
Daily ख़बरों के लिए फ़ॉलो करें
Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
विज्ञापन
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने का गंभीर मामला सामने आया है। सदर विधानसभा के पूर्व मोहाल और दलित बस्ती क्षेत्र में फॉर्म 7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम सूची से कटवाने का प्रयास किया गया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक आपत्ति की शिकायत पर बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों के साथ स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई आपत्तियां झूठी पाई गईं। कुल 14 नामों को मतदाता सूची से हटाने के लिए प्रारूप 7 (फॉर्म 7) में आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इनमें छात्रिया सुल्तान, शाजिद अली, आदि अली और अकबर अली जैसे नाम शामिल थे, जो एक ही समुदाय के बताए जा रहे हैं। स्थलीय निरीक्षण में पता चला कि इनमें से केवल दो मतदाताओं की मृत्यु हुई थी, जबकि अन्य सभी मौके पर उपस्थित मिले। इन गड़बड़ियों के सामने आने के बाद एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। जहां आपत्ति से लोगों में हड़कम सपा ने इस मामले में दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी से मिलने की बात कही है। शकीरा सुल्तान ने बताया कि उनके परिवार के तीन सदस्यों-उनके पति शाजिद अली और पुत्र आदि अली- के नाम मतदाता सूची से काटने के लिए फॉर्म 7 उपलब्ध कराया गया था। फॉर्म में कारण बताया गया था कि वे या तो यहां नहीं रहते या उनकी मृत्यु हो गई है। हालांकि, परिवार मौके पर मौजूद है और बीएलओ ने उनकी उपस्थिति का सत्यापन भी कर लिया है। छात्रिया सुल्तान ने कहा कि इस तरह की हरकत करके उन्हें जबरदस्ती परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वे सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन कर चुके हैं। वार्ड एक पूर्ण माहौल के निवासी अकबर अली ने भी इसी तरह की शिकायत की। उन्होंने बताया कि उनके घर के चार सदस्यों के नाम काटने के लिए फर्जी तरीके से फॉर्म 7 आया है। अकबर अली ने कहा कि वे यहां के मूल निवासी हैं और उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा मिले एसआईआर (SIR) का फॉर्म भी भरा था। वही अकबर अली ने चेतावनी दी कि जिस भी राजनीतिक पार्टी के बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) ने उनके नाम कटवाने का प्रयास किया है, उनके खिलाफ वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। सपा नेता प्रमोद यादव ने बताया कि यह मामला तब संज्ञान में आया जब बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) वार्ड नंबर-1 के बूथ संख्या 14 में फॉर्म बांट रहे थे। बीएलओ का तर्क था कि कुछ लोग निवास नहीं करते हैं, इसलिए उनके फॉर्म आए हैं। हालांकि, मौके पर सत्यापन करने पर पता चला कि सभी संबंधित व्यक्ति वहीं मौजूद और जीवित थे। यादव के अनुसार, कुल 14 फॉर्म 7 जमा किए गए थे, जिनमें एक ही समुदाय के लोगों के नाम काटने का प्रयास किया गया। इन फॉर्मों में नाम काटने का कारण बताया गया कि वे लोग जीवित नहीं हैं या यहां निवास नहीं करते हैं। एक सरकारी शिक्षिका सहित कई लोगों के नाम भी सूची से हटा दिए गए थे, जबकि वे सभी मौके पर उपस्थित और जीवित पाए गए। सपा नेता ने आरोप लगाया कि फॉर्म 7 का दुरुपयोग किया जा रहा है और 14 फॉर्म पर एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश बताया, जिसका उद्देश्य एक विशेष समुदाय के मतदाताओं को परेशान करना है। इस मामले को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है। प्रमोद यादव ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशानुसार, सपा कार्यकर्ता 'पड़ा प्रहरी' के तौर पर इस तरह के दुरुपयोग पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल के बीएलए को फॉर्म 7 जमा करने का अधिकार नहीं है, और ऐसा करने से बीएलओ की नौकरी पर आंच आ सकती है। सपा इस मुद्दे को लेकर दोबारा जिलाधिकारी से मिलेगी। जब से SIR प्रक्रिया चल रहा है तब से न जाने कितने बीएलओ मर गए हैं फिर भी लोग बीएलओ को परेशान करने में लगे हुए हैं। बीएलओ भी समाज का एक अभिनं अंग है वह भी हमारे भाई बंधु है लगातार काम करने से वह डिप्रेशन में जा रहे हैं। बीएलओ नितेश कुमार ने बताया को मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्रारूप 7 प्राप्त हुआ। इस फॉर्म में आपत्ति दर्ज की गई थी कि संबंधित पते पर ये सभी लोग निवास नहीं कर रहे हैं। विभाग के निर्देशों के अनुसार, बीएलओ को प्रारूप 7 स्वीकार करना था, लेकिन बिना पूरी जांच के उस पर कार्रवाई नहीं करनी थी। नितेश कुमार ने एपिक नंबर के माध्यम से सभी 14 नामों का सत्यापन शुरू किया। इस प्रक्रिया में प्रमोद यादव ने भी सहयोग किया। जांच में सामने आया कि 12 मतदाता अभी भी उसी पते पर निवास कर रहे हैं, जबकि दो मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। मौके पर मौजूद जीवित मतदाताओं ने अपने नाम हटाने के प्रयास पर कड़ी आपत्ति जताई। बीएलओ ने स्पष्ट किया कि वे नामों के बजाय एपिक नंबर से सत्यापन कर रहे थे, जिससे सटीक जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि जब एपिक नंबर संबंधित व्यक्ति का पाया गया और वह मौके पर मौजूद था, तो उसे अनुपस्थित कैसे दर्शाया जा सकता है। नितेश कुमार ने यह भी बताया कि उन्हें उच्च अधिकारियों से निर्देश हैं कि किसी भी राजनीतिक पार्टी द्वारा दिए गए प्रारूप 7 को स्वीकार किया जाए, लेकिन व्यक्तिगत सत्यापन के बिना उस पर कोई कार्रवाई न की जाए। उन्होंने कहा कि चूंकि सत्यापन में पाया गया कि नाम काटने के लिए दिए गए लोग मौके पर मौजूद हैं और लंबे समय से निवासी हैं, इसलिए वे प्रारूप 7 जमा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करेंगे। बीएलओ ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि प्रारूप 7 की पूरी प्रक्रिया तहसील स्तर से होनी चाहिए और इसे वहीं जमा किया जाना चाहिए। उनका सुझाव था कि यदि परिवार का कोई सदस्य स्वयं प्रारूप 7 भरकर नाम कटवाता है, तो इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं होगी।
