Sonbhadra News: परशुराम जयंती पर करारी में काव्यार्चन का आयोजन, शहीद स्थल पर कवियों ने दी प्रस्तुति.
सोनभद्र के करारी शहीद स्थल पर रविवार शाम भगवान परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में काव्यार्चन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भगवान परशुराम, मां शारदे और अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में कवियों ने ओज, हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार और देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
sonbhadra
7:24 PM, Apr 19, 2026
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कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भगवान परशुराम, मां शारदे और अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
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Story By: विकाश कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
जनपद के करारी शहीद स्थल पर रविवार शाम भगवान परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में काव्यार्चन का आयोजन किया गया। यह आयोजन शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी सोनभद्र के तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि शिवदास चंदौली ने की। मुख्य अतिथि अजय चतुर्वेदी 'कक्का' और विशिष्ट अतिथि दिवाकर द्विवेदी 'मेघ' व शिक्षिका कौशल्या कुमारी चौहान रहीं। अतिथियों ने मंत्रोच्चारण के साथ भगवान परशुराम, मां शारदे और अमर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीपदान कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। सोन संगीत फाउंडेशन के सुशील मिश्रा ने वाणी वंदना करते हुए "जगमग जोत जरादा जननी सबके रहिया दिखा दा हो" सस्वर सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। ओज की कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने "दुष्टों का कर दूंगी नाश मैं दुर्गा भवानी हूँ" प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम का सफल संचालन अधिवक्ता अशोक तिवारी ने किया, जिन्होंने "अंधकार का नाश करो जनजन का संत्रास हरो राम परशु लेकर आओ धर्म ध्वजा आकाश करो" सुनाकर महफिल में जोश भर दिया। मुख्य अतिथि अजय चतुर्वेदी 'कक्का' ने समसामयिक अभिव्यक्ति देते हुए कहा, "मेरे पूर्वज संस्कृति पर जो भी हमला बोलेगा, उनको सबक सिखाएंगे हम मौन नहीं रह सकते हैं।" उनकी प्रस्तुति को गंभीर चिंतन के लिए सराहा गया। दिवाकर द्विवेदी 'मेघ' ने भगवान परशुराम पर काव्यार्चन करते हुए "शक्ति साहस शौर्य सेवा सत्य शिव व्यवहार दे, लेकर फरशा परशु अपना मनुजता को धार दे" और "आदमी अब कितना रह गया है आदमी" सुनाकर श्रोताओं में ऊर्जा का संचार किया। आयोजक अधिवक्ता प्रद्युम्न त्रिपाठी ने अपनी रचना में कहा, "परशुराम के वंशज हो तो राह पर उनके चलना सीख, सदा आचरण हेतु मनुजता, जाग पर उनके रहना सीख।" विवेक चतुर्वेदी ने अपनी शायरी से देर तक वाहवाही लूटी, जबकि अधिवक्ता धर्मेश चौहान ने देश वंदना कर काव्यार्चन को सफल बनाया। दयानंद दयालु, अनमोल मणि, ऋषभ त्रिपाठी, लेखपाल अशोक तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार सुनील तिवारी, विजय विनीत, सुधाकर पांडेय, स्वदेश प्रेम और दिलीप सिंह दीपक सहित कई कवियों ने हास्य, व्यंग्य, ओज, श्रृंगार, छंद, गीत, गजल और लोक भाषा की अनेक रचनाएं सुनाकर लोगों को उत्साह से भर दिया। अंत में, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे चंदौली से पधारे वरिष्ठ कवि शिवदास ने "लहर रहा है गगनांगन में गौरव का अभिमान तिरंगा मांग रहा बलिदान" सुनाकर राष्ट्र वंदन के साथ आयोजन का समापन किया। सभी कवियों का सारस्वत अभिनंदन किया गया।
