Sonbhadra News: शिक्षकों की अनुपस्थिति से नाराज ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन, ग्रामीणों की दो टूक मांग शिक्षकों को सेवा से किया जाये बर्खास्त.
सोनभद्र के नगवां ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय झरना में शिक्षकों की अनुपस्थिति से नाराज ग्रामीणों ने विरोध किया। लगातार शिक्षकों की अनुपस्थिति से सरकार का 80,000 रुपये प्रति माह व्यर्थ जा रहा है और बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
sonbhadra
12:50 PM, Sep 24, 2025
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शिक्षकों के अनुपस्थिति से स्कूली बच्चे बाहर खड़े रहने पर मज़बूर।
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Story By: कन्हैया लाल यादव, नगवां।
सोनभद्र।
नगवां ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय झरना में शिक्षकों की अनुपस्थिति से नाराज ग्रामीणों ने विरोध किया। शिक्षकों की अनुपस्थिति से ग्रामीणों में इस कदर रोष व्याप्त था कि उन्होंने लचर रवैया अपनाने वाले सभी शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त करने की मांग कर डाली। बता दे कि विद्यालय में कुल चार शिक्षक नियुक्त हैं, लेकिन मंगलवार को कोई भी शिक्षक नहीं आया।
बुधवार को भी केवल एक शिक्षक अमरनाथ देर से पहुंचे। बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर पढ़ने के लिए आए, लेकिन स्कूल में ताला लगा होने के कारण उन्हें बाहर ही बैठना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इस स्थिति से क्षेत्र के शैक्षिक माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वही एबीएसए धनंजय सिंह ने कहा कि जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों ने बताया कि मंगलवार को शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण ताला बंद होने से उन्हें निराश होकर घर वापस लौटना पड़ा। बुधवार को भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। आज लगातार दूसरे दिन भी स्कूल में केवल एक शिक्षक उपस्थित रहे। वही ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार गुप्ता ने बताया कि शिक्षकों की अनुपस्थिति की शिकायत कई बार एबीएसए से की गई है।
उन्होंने एबीएसए और शिक्षकों के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया है। राजकुमार गुप्ता ने कहा शिक्षक मनमाने ढंग से छुट्टी पर चले जाते हैं। विद्यालय की स्थिति भी जर्जर है। न तो रंगाई-पुताई हो रही है और न ही साफ-सफाई। इस संबंध में भी एबीएसए को सूचित किया गया था। मौके पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों ने मिलीभगत से नियुक्ति पाई है और मनमाने ढंग से स्कूल आते-जाते हैं।
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ग्रामीणों ने ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार का 80,000 रुपये प्रति माह व्यर्थ जा रहा है और बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। आज सुबह केवल एक शिक्षक 9:30 बजे पहुंचे, जबकि स्कूल का समय सुबह 8:00 बजे है।
सरकार विद्यालयों के लिए पर्याप्त धनराशि दे रही है, इसलिए अधिकारियों को विद्यालय के सुचारु संचालन की पहल करनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक या तो घर पर रहते हैं या छुट्टी मनाने बाहर चले जाते हैं। उन्हें बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि बच्चे पढ़ने आते हैं या केवल खाना खाने।
विद्यालय की दाई निर्मला ने बताया कि शिक्षकों की अनुपस्थिति में कल का बना खाना बर्बाद हो गया। बच्चों को 12:00 बजे ही घर भेजना पड़ा। उन्होंने बताया कि शिक्षक स्कूल नहीं आते, लेकिन रजिस्टर में हाजिरी दर्ज हो जाती है। दाई ने बताया मध्याह्न भोजन की व्यवस्था में भी कमियां हैं।
एक सप्ताह के राशन से दो सप्ताह का भोजन बनाने का दबाव बनाया जाता है। बर्तनों की भी कमी है। दुग्ध भी बच्चों को पर्याप्त मात्रा में नहीं दी जाती। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि या तो विद्यालय सुचारू रूप से चलाया जाए या फिर इसे बंद कर दिया जाए।
उन्होंने सभी शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग की है। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे एबीएसए और बीएसए से लेकर लखनऊ तक शिकायत करेंगे।



