Sonbhadra News: 10–15 मिनट में खत्म हुई लोक सुनवाई, ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल.
बिल्ली मारकुंडी में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर आयोजित लोक सुनवाई विवादों में घिर गई। पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जनसुनवाई उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, सोनभद्र के तत्वावधान में आयोजित की गई थी। ग्रामीणों की संख्या नदारद होने से जनसुनवाई की पारदर्शिता और उद्देश्य पर उठ रहे सवाल। 10–15 मिनट में खत्म हुई लोक सुनवाई, ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल।
sonbhadra
5:18 PM, Feb 27, 2026
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ग्रामीणों की संख्या नदारद होने से जनसुनवाई की पारदर्शिता और उद्देश्य पर उठ रहे सवाल।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
ओबरा तहसील के ग्राम बिल्ली मारकुंडी में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर 27 फरवरी 2026 को आयोजित लोक सुनवाई विवादों में घिर गई। पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए यह जनसुनवाई उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, सोनभद्र के तत्वावधान में आयोजित की गई थी। जानकारी के प्रस्ताव के तहत श्रीमती केशरी देवी पत्नी हरेराम प्रसाद, पता-शिव नगर कालोनी, डिग्री कालेज रोड, ओबरा -सोनभद्र व अन्य के नाम से प्रस्ताव है जिसका अराजी संख्या 4870 क, 4871 क एवं 4871 ख, रकबा 1.2280 हेक्टेयर में डोलो स्टोन खनन की भी योजना है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित समय पर शुरू हुई लोक सुनवाई में संबंधित अधिकारी मात्र 10 से 15 मिनट रुकने के बाद ही चले गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनसुनवाई कम से कम दो घंटे चलनी चाहिए थी, ताकि दर्जनों प्रभावित होने वाले परिवार अपनी समस्याएं रख सकें।
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पर्यावरण के लिए कार्य करने वाले प्रयावरणवादी निर्भय चौधरी ने खनन से होने वाले संभावित पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता जताई। उनका कहना है कि खदानों में पानी भरने के बाद निकलने वाला प्रदूषित पानी आसपास के खेतों को बंजर बना देता है। अधिक गहराई तक खनन से जलस्तर नीचे चला जाता है, जिससे बोरिंग का पानी गंदा और पीने योग्य नहीं रह जाता। टिप्पर वाहनों के लगातार आवागमन से उड़ने वाली धूल-मिट्टी घरों तक पहुंच रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि खनन पट्टा स्वीकृत होने के बाद अंधाधुंध खनन किया जाता है और पेड़ लगाने के नियमों का पालन नहीं होता। कई स्थानों पर पुराने पेड़ काट दिए जाते हैं और न कही स्वास्थ शिविर लगते न ही पर्यवारण के लिए पौधे लगाये जाते बल्कि भुगरभ का दोहन पर्यवारण का नुकसान ही करते हैं। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान अधिकतर लोग परियोजना से जुड़े कर्मचारी ही मौजूद थे, जबकि वास्तविक स्थानीय निवासियों की संख्या बेहद कम थी।
ऐसे में जनसुनवाई की पारदर्शिता और उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मौके पर लगे पोस्टर में साफ लिखा था कि सुनवाई के दौरान स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों व संबंधित पक्षों को परियोजना के संबंध में अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर प्रदान किया जाएगा। प्रशासन ने अधिक से अधिक लोगों से सहभागिता की अपील का भी जिक्र है। लेकिन मामला यहां उल्टा होता दिख रहा। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि सरकार पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के प्रति गंभीर है तो लोक सुनवाई की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। वही प्रशासन ने क्षेत्रवासियों से सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की है।



