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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news questions raised again on the mine allegation of mining many times the capacity allegation of extraction more than the prescribed cubic meter

Sonbhadra News: खदान पर फिर उठे सवाल, क्षमता से कई गुना खनन का आरोप, निर्धारित घनमीटर से ज्यादा निकासी का आरोप.

बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र की एक पत्थर खदान पर क्षमता से कई गुना अधिक खनन, अत्यधिक ब्लास्टिंग और भूजल दोहन के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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4:27 PM, Jul 7, 2026

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Sonbhadra News: खदान पर फिर उठे सवाल, क्षमता से कई गुना खनन का आरोप, निर्धारित घनमीटर से ज्यादा निकासी का आरोप.
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खदान को लेकर क्षमता से अधिक खनन और नियमों के उल्लंघन के आरोपों की जांच की मांग उठी।

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Story By: आर. एन. पाण्डेय, डाला।

सोनभद्र।

जनपद के बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में संचालित एक पत्थर खदान को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतकर्ता निर्भय चौधरी ने जिलााधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि खदान में खनन विभाग और पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक खनन किया जा रहा है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, बाड़ी क्षेत्र स्थित अराजी संख्या 7410 क, 7409, 7402 क, 7403 क, 7404 एवं 7405 ख की कुल 2.010 हेक्टेयर भूमि पर ई-टेंडर के माध्यम से खनन पट्टा स्वीकृत है। इस खदान को एक वर्ष में 60 हजार घन मीटर पत्थर खनन की पर्यावरणीय स्वीकृति (ईसी) प्राप्त है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसके अनुसार प्रतिदिन लगभग 190 से 191.25 घन मीटर, यानी करीब 45 से 50 टिप्पर पत्थर की निकासी की अनुमति है, जबकि वास्तविकता में प्रतिदिन 500 से 800 टिप्पर तक पत्थर का परिवहन किया जा रहा है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि खदान में ट्रांसफार्मर लगाकर बड़ी मशीनों के माध्यम से भूजल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारियों से आवश्यक अनुमति ली गई है। साथ ही आरोप है कि निर्धारित सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए भारी ब्लास्टिंग की जा रही है। जो बरसात के मौसम में बिलकुल भी उचित नहीं। शिकायतकर्ता के अनुसार, जहां एक बार में 160 से 200 ब्लास्टिंग होल की अनुमति बताई जाती है, वहीं प्रतिदिन 3,000 से 7,000 होल तक ब्लास्टिंग किए जाने का दावा किया गया है। उनका कहना है कि इससे आसपास के ग्रामीणों, वन्यजीवों, पर्यावरण तथा शक्तिनगर राजमार्ग से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। निर्भय चौधरी का आरोप है कि कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों को लिखित एवं दूरभाष के माध्यम से शिकायतें भेजी गईं, लेकिन उन्हें केवल जांच का आश्वासन मिलता रहा। उनका कहना है कि जांच दल कब आता है, क्या जांच करता है और क्या कार्रवाई होती है, इसकी जानकारी शिकायतकर्ताओं को नहीं दी जाती, जिससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठते हैं।शिकायतकर्ता ने जिलााधिकारी से मांग की है कि खदान में वास्तविक खनन, परिवहन, ब्लास्टिंग और भूजल दोहन की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पट्टाधारक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए राजस्व क्षति की 5 गुणा भरपाई कराई जाए तथा नियमों के अनुसार पांच गुना अर्थदंड लगाया जाए।

नोट-: प्रशासन एवं संबंधित पट्टाधारक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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