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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news questions raised again on the poor condition of obra inter college claim of reduction from 1523 to 40 50 students resentment seen

Sonbhadra News: ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाली पर फिर उठे सवाल, 1523 से घटकर 40-50 छात्र होने का दावा, दिखी नाराजगी.

ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया पर विद्यालय की समस्याओं को लेकर पोस्ट वायरल होने के बाद आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ग्रामीणों ने शिक्षकों की कमी, सुविधाओं के अभाव और विद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग उठाई है।

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6:03 PM, Sep 14, 2026

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Sonbhadra News: ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाली पर फिर उठे सवाल, 1523 से घटकर 40-50 छात्र होने का दावा, दिखी नाराजगी.
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(फ़ाइल फोटो )

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Story By: विकास कुमार हलचल, ओबरा।

ऐतिहासिक ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर आवाज तेज होने लगी है। विद्यालय को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल होने के बाद ग्रामीणों के बीच आंदोलन की सुगबुगाहट साफ दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कभी आसपास के 15 से 20 गांवों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहे इस विद्यालय की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में लगातार कमजोर हुई है। ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2023 में विद्यालय में करीब 1523 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर महज 40 से 50 के आसपास रह गई है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि निजी संस्था डीएवी को विद्यालय दिए जाने के बाद से शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ने की बात कही जा रही है। लोगों का कहना है कि करीब तीन वर्षों से विद्यालय के मुख्य गेट पर ओबरा इंटर कॉलेज का नाम-पट्ट तक नहीं लगाया गया है। आरोप है कि पुराने बोर्ड को पेंट कराने के बाद विद्यालय का नाम दोबारा नहीं लिखा गया। विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नियमित प्रार्थना और राष्ट्रगान जैसी गतिविधियां भी प्रभावित हैं। खेलकूद और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा गेम टीचर से प्रवक्ता का कार्य कराने तथा कक्षा छह से आठ तक के संचालन को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। रात में विद्यालय परिसर में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। इधर विद्यालय के कुछ हिस्से को दोबारा डीएवी संस्था को दिए जाने की चर्चा से ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जिस विद्यालय में कभी बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा ग्रहण करते थे, उसकी छात्र संख्या में कथित रूप से इतनी बड़ी गिरावट गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों और पूर्व छात्रों ने सवाल उठाया कि यदि विद्यालय की स्थिति लगातार खराब हो रही है तो खंड शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से इसका संज्ञान लेकर जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि विद्यालय के मुख्य गेट पर तत्काल ‘ओबरा इंटर कॉलेज’ का नाम लिखाया जाए। साथ ही इंटर कॉलेज की तरफ खुलने वाले गेट को बंद करने और इंटर कॉलेज के खेल मैदान में डीएवी के बच्चों के आने पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समय रहते विद्यालय की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को निर्णायक रूप दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर शुरू हुई आवाज अब जमीन पर उतरने की तैयारी में नजर आ रही है। हालांकि विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


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