Sonbhadra News: जिला अस्पताल लोढ़ी की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल, सुधार की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन.
जिला अस्पताल लोढ़ी की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर टीम सोनभद्र ने सीएमओ को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने प्रसूता महिलाओं और अन्य मरीजों को समय पर इलाज न मिलने, स्टाफ के असंवेदनशील व्यवहार और अस्पताल की अव्यवस्थाओं का आरोप लगाया। एक पीड़ित परिवार ने प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
sonbhadra
4:55 PM, Jul 25, 2026
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जिला अस्पताल लोधी की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने सीएमओ को सौंपा ज्ञापन।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।
सोनभद्र।
जिला अस्पताल लोढ़ी की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर टीम सोनभद्र एवं अन्य प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और अन्य मरीजों को समय पर समुचित उपचार नहीं मिल रहा है तथा स्वास्थ्य सेवाओं में कई प्रकार की कमियां हैं।
मामले से मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी को भी अवगत कराया गया। ज्ञापन में कहा गया कि अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को उपचार में लापरवाही, डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ के असंवेदनशील व्यवहार तथा आवश्यक सुविधाओं के अभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि प्रसूता महिलाओं सहित सभी मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं और अस्पताल की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही अस्पताल में स्वच्छता, दवाइयों की उपलब्धता, जांच सुविधाओं और शिकायत निस्तारण व्यवस्था को भी सुदृढ़ करने की मांग की गई।
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इस दौरान एक पीड़ित परिवार ने भी अपनी आपबीती साझा की। पीड़िता की बहन आरती पटेल ने आरोप लगाया कि 21 जुलाई को प्रसव के लिए बहन को जिला अस्पताल लाया गया था, जहां जांच के बाद जल्द डिलीवरी का आश्वासन दिया गया, लेकिन पूरी रात इंतजार के बावजूद प्रसव नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना जानकारी दिए इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद प्रसव पीड़ा भी कम हो गई। अगले दिन बहन की हालत बिगड़ने पर कई बार नर्सिंग स्टाफ से मदद मांगी गई, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिला।
आरती पटेल के अनुसार बाद में उनकी बहन को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, लेकिन कुछ समय बाद अस्पताल ने केस संभालने में असमर्थता जताते हुए बनारस रेफर कर दिया। मजबूरी में वह अपनी बहन को निजी अस्पताल लेकर गईं, जहां चिकित्सकों ने स्थिति गंभीर बताते हुए मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा बताया। हालांकि उपचार के बाद दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन नवजात अभी विशेष निगरानी में है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। साथ ही अस्पताल प्रशासन से गरीब और जरूरतमंद मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार करने की अपील की गई।
