Sonbhadra News: 63 साल पुरानी रामलीला परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प, शिवद्वार में हुआ मुकुट पूजन.
घोरावल के शिवद्वार मंदिर में ऐतिहासिक रामलीला के 63वें वर्ष का मुकुट पूजन श्रद्धा और विधि-विधान से संपन्न हुआ। आचार्य शिवानंद शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कराया, श्रद्धालुओं ने श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया गया।
sonbhadra
6:56 PM, Sep 25, 2026
Share:


शिवद्वार में 63वीं रामलीला के मुकुट पूजन कार्यक्रम में रामलीला समिति के पदाधिकारी एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
Daily ख़बरों के लिए फ़ॉलो करें
Story By: विकास कुमार हलचल।
सोनभद्र।
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर घोरावल क्षेत्र के शिवद्वार मंदिर परिसर में आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। ग्राम पंचायत सत्तद्वारी स्थित शिवद्वार मंदिर में ऐतिहासिक रामलीला के 63वें वर्ष के मुकुट पूजन का आयोजन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए पूजन के साथ ही रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। मुकुट पूजन की धार्मिक प्रक्रिया आचार्य शिवानंद शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराई। पूजन के दौरान रामलीला से जुड़े पदाधिकारियों, श्रद्धालुओं और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ सामाजिक एकता और सद्भाव को मजबूत करने पर जोर दिया।
नई पीढ़ी तक पहुंचे रामलीला की विरासत-:
विज्ञापन
आयोजन में वक्ताओं ने कहा कि 63 वर्षों से चली आ रही रामलीला केवल मंच पर होने वाला धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन चुकी है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया जाता है।उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, सेवा, कर्तव्य, भाईचारे और मर्यादा का संदेश देता है। रामलीला के पात्रों और प्रसंगों के माध्यम से इन मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का कार्य लगातार किया जा रहा है।
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश-:
मुकुट पूजन कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और लोककल्याण की भावना को भी प्रमुखता दी गई। उपस्थित लोगों ने क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और सर्वांगीण विकास की कामना करते हुए रामलीला की गौरवशाली परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। आयोजकों ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं। ऐसे आयोजनों में लोगों की सहभागिता सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती है और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में मदद करती है। मुकुट पूजन कार्यक्रम में श्रीकांत दुबे, अंगद विश्वकर्मा, सच्चिदानंद मिश्र, राजेश्वर राम शुक्ल, गणेश विश्वकर्मा, सुनील कुमार दुबे, शिवनारायण दुबे, गोपाल मणि शुक्ल, ओम प्रकाश दुबे, जगदीश मिश्र, सूर्यकांत दुबे, धीरेन्द्र मिश्र, श्रीनिवास दुबे, अमित मिश्रा, इंद्रकांत दुबे प्रवीण, रविंद्र नाथ पाठक, व्यास जी श्यामानंद मिश्र और अनिल कुमार दुबे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में भगवान श्रीराम से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि, लोककल्याण और सर्वांगीण विकास की मंगलकामना की गई। साथ ही 63 वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा को इसी श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।



