Sonbhadra News: छठ महापर्व का दूसरा दिन 'खरना' आज, 36 घंटे का निर्जला व्रत की शुरुआत.
छठ महापर्व का दूसरा दिन 'खरना' आज देशभर में मनाया जा रहा है। इस दिन से 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है, जिसमें व्रती महिलाएं सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करती हैं। खरना के दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। सूर्यास्त के बाद गुड़-चावल की खीर, रोटी और फल का प्रसाद छठी मैया को अर्पित कर उपवास तोड़ा जाता है। यह प्रसाद बाद में ग्रहण किया जाता है।
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5:38 PM, Oct 26, 2025
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व्रती महिलाएं सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करती।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
छठ महापर्व का दूसरा दिन 'खरना' आज देशभर में मनाया जा रहा है। इस दिन से 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है, जिसमें व्रती महिलाएं सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करती हैं। खरना के दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। सूर्यास्त के बाद गुड़-चावल की खीर, रोटी और फल का प्रसाद छठी मैया को अर्पित कर उपवास तोड़ा जाता है। यह प्रसाद बाद में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि खरना के दिन की गई भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव और छठी मैया व्रतियों को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह दिन छठ पूजा के कठिन अनुष्ठान की वास्तविक शुरुआत का प्रतीक है।
सोनभद्र जिले का चोपन छठ घाट विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। यह जिला बिहार और झारखंड सहित चार राज्यों से घिरा है, जहां से छठ पूजा की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।चोपन रेलवे स्टेशन में कार्यरत लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारी बिहार और झारखंड से हैं। कई सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी भी इस शांत इलाके में बस गए हैं, जो स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर छठ पूजा मनाते हैं। इस वर्ष देर तक मानसून रहने के कारण सोन नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। पास के बांध से पानी निकासी बंद करने की अपील के बावजूद नदी में पानी लबालब भरा है।
एहतियात के तौर पर नदी क्षेत्र को बैरिकेड कर जाल लगाया गया है, और प्रशासन ने जगह-जगह 'डेंजर' बोर्ड लगाए हैं।किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ टीम को मुस्तैद किया गया है। प्रशासनिक अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।सूर्यास्त के बाद व्रती महिलाएं उपवास तोड़कर गुड़ की खीर और पूरी का प्रसाद ग्रहण करती हैं। यह प्रसाद बाद में परिवार और समाज के सदस्यों में वितरित किया जाता है, जो इस पर्व की सामुदायिक भावना को दर्शाता है। खरना का दिन शुद्धता और अनुशासन के पालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पूरे घर की साफ-सफाई की जाती है और पूजा स्थल को पूर्णतः पवित्र रखा जाता है।
खरना का प्रसाद बिना नमक, मसाले या किसी तैलीय पदार्थ के तैयार किया जाता है। यह सात्विक भोजन शरीर और मन की शुद्धि में सहायक माना जाता है।खरना की पूजा सूर्यास्त के तुरंत बाद संपन्न की जाती है। दिनभर निर्जल उपवास रखने के बाद व्रती संध्याकाल में स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं। इसके उपरांत घर में मिट्टी या पीतल के चूल्हे पर प्रसाद तैयार किया जाता है। इस प्रसाद में गुड़ की खीर, रोटी और केले का भोग प्रमुख होता है। पूजा के बाद व्रती सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हुए यह प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिसे 'खरना प्रसाद' कहा जाता है। छठ महापर्व शुरू हो चुका है। नहाय-खाय और खरना के बाद, व्रत रखने वाली महिलाएं अर्घ्य देने की तैयारी करती हैं। इस दौरान पूजा की टोकरी या सूप में कई तरह के फल और पकवान सजाए जाते हैं।
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छठ पूजा में कुछ विशेष फल ऐसे हैं जिनके बिना यह पर्व अधूरा माना जाता है। ये फल न केवल छठ मैया को प्रिय हैं, बल्कि पवित्रता के प्रतीक भी माने जाते हैं। छठ पूजा में डाभ नींबू का विशेष महत्व है। यह सामान्य नींबू से आकार में बड़ा और अंदर से लाल होता है, जिसका स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है। इसकी मोटी परत इसे अशुद्ध होने से बचाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह फल छठ मैया को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इसे पूजा में अवश्य शामिल किया जाता है। केले का भी छठ पूजा में अत्यधिक महत्व है। मान्यता है कि इसमें भगवान विष्णु का वास होता है। इसे घर पर ही पकाया जाता है ताकि इसकी शुद्धता बनी रहे। पूजा की टोकरी में केले को शामिल करने से जीवन में समृद्धि आती है और छठ मैया का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सुथनी चढ़ाने का भी छठ पूजा में विशेष महत्व है। इसे एक शुद्ध और पवित्र कंद माना जाता है, जो सूर्यदेव और छठी मैया की कृपा प्राप्त करने का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। गन्ने के बिना छठ पूजा अधूरी मानी जाती है। कई स्थानों पर गन्ने का मंडप बनाकर उसके नीचे दीप जलाए जाते हैं। पत्तों सहित गन्ने को पवित्र माना जाता है क्योंकि यह सख्त होता है और कोई पशु इसे जूठा नहीं कर पाता। ऐसी मान्यता है कि गन्ने की उपस्थिति से छठ मैया प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, सुपारी का उपयोग हर शुभ कार्य में किया जाता है।
यह कठोरता और स्थिरता का प्रतीक है। पूजा में सुपारी को देवी लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक समझा जाता है। छठ पर्व में इसे सूप में रखना अनिवार्य माना गया है। सिंघाड़ा जल में पनपने वाला फल है, जो पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इसका सख्त छिलका इसे अशुद्ध होने से बचाता है। छठ मैया को यह फल प्रिय है और माना जाता है कि इसे चढ़ाने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। नारियल को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, इसलिए इसे सबसे पवित्र फल कहा जाता है।
नारियल को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, इसलिए इसे सबसे पवित्र फल कहा जाता है।छठ पूजा में नारियल चढ़ाने से भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नारियल शुद्धता और समर्पण का प्रतीक है, इसलिए इसे सूप और टोकरी में जरूर शामिल करना चाहिए। हालांकि महंगाई ने असर ज़रूर डाला है। कुछ दुकानदार भी मौके को भुना कर अत्यधिक दामों में फल बेचते नज़र आये।



