Sonbhadra News: बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में अवैध खनन के गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग.
"पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता निर्भय चौधरी" ने बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में अवैध खनन, भारी विस्फोटकों के कथित उपयोग, भूजल दोहन और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन और खान विभाग से कार्रवाई की अपील की है।
sonbhadra
2:35 PM, Jul 30, 2026
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बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में अनियमितताओं का आरोप लगाते सामाजिक कार्यकर्ता निर्भय चौधरी, शिकायत पत्र और संबंधित खनन पट्टे का दृश्य।
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Story By: आर.एन. पाण्डेय, डाला।
सोनभद्र।
बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र को लेकर "पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता निर्भय चौधरी" ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिला प्रशासन और खान विभाग को कई शिकायतें भेजने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खनन पट्टों पर डीजीएमएस के निर्देशों की अनदेखी कर नियमों के विपरीत खनन किया जा रहा है। भारी मशीनों और अत्यधिक विस्फोटकों के कथित उपयोग से राजस्व और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का भी दावा किया गया है। साथ ही ग्रामीणों में भय का माहौल होने की बात कही गई है। उन्हें संदेह है कि पूरा खनन विभाग अवैध खनन को संरक्षण दे रहा है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उनके पत्र खनन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंच रहे हैं और उन्हें बीच के स्तर पर ही दबा दिया जा रहा है। हाल ही में, निर्भय चौधरी ने "श्रीराम एसोसिएट्स" के पट्टे का दौरा किया, जो क्रेशर यूनियन के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह के नाम पर है।
वहां उन्होंने भारी अनियमितताएं देखीं। डीजीएमएस ने धारा 22 के तहत सुधारात्मक कार्य करने के निर्देश दिए थे, जिनका पालन नहीं हो रहा है। चौधरी के अनुसार, डीजीएमएस ने प्रतिदिन कुछ किलोग्राम विस्फोटक के उपयोग की अनुमति दी है, जबकि उस पट्टे पर 500 से 1000 किलोग्राम तक विस्फोटक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है और सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। निर्भय चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि क्रेशर यूनियन के अध्यक्ष होने के नाते अजय कुमार सिंह का कई खदानों पर प्रभाव है। वे साईं राम इंटरप्राइजेज, शिव स्टोन और मंगला प्रसाद सहित कई अन्य खदानों का संचालन और देखरेख भी कर रहे हैं। निर्भय चौधरी ने खनन क्षेत्र में अवैध सिंडिकेट सक्रिय होने का आरोप लगाया है। सिंडिकेट के सक्रिय सदस्यों पर छापा भी पड़ चूका है। जिससे खनन क्षेत्र में हड़कंप भी मचा था, लेकिन कुछ समय बाद वही रित चल रही। निर्भय चौधरी ने कहा कि अजय कुमार सिंह के क्रेशर यूनियन अध्यक्ष बनने के बाद से अनियमितताएं बढ़ी हैं। स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है और पूरा खनन एक्सकेवेटर मशीनों से किया जा रहा है। निर्भय चौधरी के अनुसार, खनन में भारी क्षमता वाले लिफ्टरों का उपयोग कर भूजल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। उन्होंने जिन खदानों की शिकायत की है, उनमें से किसी के पास भी भूगर्भ जल प्रबंधन का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं है, जबकि यह 2019 से अनिवार्य है। निर्भय चौधरी ने आरोप लगाया कि खननकर्ता खुलेआम कहते हैं कि शिकायत करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि पूरा खनन विभाग उनके चंगुल में है। उन्होंने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से खान निरीक्षक अतुल दुबे द्वारा उनकी शिकायतों पर लगाई गई कथित फर्जी रिपोर्ट की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है।
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चौधरी का दावा है कि अतुल दुबे ने उनकी पांच शिकायतों पर बिना मौके पर जाए रिपोर्ट लगा दी। न तो वे फोन उठाते हैं और न ही शिकायतकर्ता से संपर्क करते हैं। केवल कागजों में कार्रवाई दिखाई जाती है। बरसात के मौसम में भारी ब्लास्टिंग पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्भय चौधरी ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। उन्होंने बताया कि तेज ब्लास्टिंग के कारण आसपास के मकानों की दीवारों में दरारें आ जाती हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। उन्होंने खनन विभाग पर इस मामले में पूरी तरह लिप्त होने का आरोप लगाया। चौधरी ने यह भी बताया कि आधुनिक समय में मजदूरों से काम नहीं कराया जा रहा है, बल्कि केवल कागजों में उनका नाम दिखाया जाता है। पूरा काम एक्सकेवेटर मशीनों से हो रहा है। उन्होंने कहा कि खान सुरक्षा सप्ताह भी केवल कागजों में मनाया जाता है। अधिकांश खदानों में बेंचिंग नहीं है, और चार से पांच सौ फीट ऊंची सीधी पहाड़ियां खड़ी हैं, जिनके धंसने से मशीनें और लोग दोनों दब सकते हैं। पट्टा आवंटन की जनसुनवाई के दौरान स्वास्थ्य, पर्यावरण और पौधारोपण के वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं होता। पौधारोपण केवल कागजों में होता है, जिससे आसपास की जमीन बंजर होती जा रही है। निर्भय चौधरी ने बताया कि बरसात और गर्मी दोनों मौसमों में भारी क्षमता वाले लिफ्टरों से भूजल का अत्यधिक दोहन कर पानी नालों में बहा दिया जाता है, जबकि स्थानीय लोग पानी की समस्या से जूझते हैं। शिकायतकर्ता ने एक बार पुनः पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
(नोट: यह समाचार "पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता निर्भय चौधरी" द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित विभाग या आरोपित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)



