Sonbhadra News: सोनभद्र खनन हादसा: कलेक्ट्रेट पर मृतकों के लिए शोक सभा के बाद भाकपा की बड़ी मांग, खनन हादसे की हो न्यायिक जांच.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष खनन हादसे के विरोध में प्रदर्शन किया। पार्टी ने खनन क्षेत्र को सील कर न्यायिक जांच कराने की मांग की। यह प्रदर्शन ओबरा के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में बीते शनिवार, 15 नवंबर 2025 को हुए खनन हादसे को लेकर किया गया।
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7:02 PM, Nov 18, 2025
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सोनभद्र खनन हादसा: फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करके दोषियों को तत्काल सजा दिलाई जाये- भाकपा
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष खनन हादसे के विरोध में प्रदर्शन किया। पार्टी ने खनन क्षेत्र को सील कर न्यायिक जांच कराने की मांग की। यह प्रदर्शन ओबरा के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में बीते शनिवार, 15 नवंबर 2025 को हुए खनन हादसे को लेकर किया गया। इस घटना में माइंस की बड़ी चट्टान गिरने से लगभग डेढ़ दर्जन मजदूर खदान के अंदर दब गए थे। प्रदर्शन से पहले मृतकों के प्रति दो मिनट का मौन धारण कर शोक सभा की गई। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि 15 नवंबर 2025 को जब प्रदेश के मुख्यमंत्री सोनभद्र में 'जनजातीय गौरव दिवस' कार्यक्रम में मौजूद थे, तब भी राजनेताओं, शासन और प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन धड़ल्ले से जारी था। दोपहर लगभग तीन बजे माइंस की बड़ी चट्टान गिरने से अंदर काम कर रहे सभी मजदूर गहरी खदान में दब गए। भाकपा नेताओं ने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा समय पर त्वरित बचाव व्यवस्था की जाती, तो उन मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना स्थल पर राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं को जाने से रोका जा रहा है, जिससे घटना को दबाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन माइंस के अंदर दबे मजदूरों के जीवित या मृत होने के बारे में कोई जानकारी देने को तैयार नहीं है। इस हादसे ने खनिज विभाग और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर किया है। जिले में सैकड़ों खदानें बिना सुरक्षा मानकों के संचालित हो रही हैं। सोनभद्र में खनन सिंडिकेट का दबदबा काफी मजबूत होता जा रहा है और अवैध खनन खुलेआम जारी है। 15 नवंबर की यह घटना खनन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक गंभीर उदाहरण है। बता दे कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की सोनभद्र जिला कमेटी ने खनन हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी ने घटना की न्यायिक जांच और मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। पार्टी ने यह भी मांग की है कि खदान में फंसे सभी मजदूरों को तत्काल बाहर निकाला जाए, चाहे वे जीवित हों या मृत। इसके अतिरिक्त, मृतक मजदूरों के आश्रितों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। भाकपा ने घटना में संलिप्त सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की है और फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से उन्हें तत्काल सजा दिलाने की बात कही है। पार्टी ने सोनभद्र जिले में हो रहे अवैध खनन पर प्रतिबंध लगाने और सभी खदानों को सील करने की भी मांग की।
पार्टी नेताओं ने बताया कि इन मांगों को लेकर राष्ट्रपति और राज्यपाल को लिखित पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप और कार्रवाई की अपील की गई है। धरना प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने देश और प्रदेश में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों (जैसे बलात्कार, हत्या, छेड़खानी, जातीय उत्पीड़न, धार्मिक उत्पीड़न, मॉब लिंचिंग) और बुलडोजर संस्कृति के खिलाफ भी आवाज उठाई। साथ ही, किसानों, गरीबों और मजदूरों की समस्याओं को भी उठाया गया। धरना प्रदर्शन को प्रमुख रूप से पार्टी के राज्य कार्यकारिणी सदस्य और जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा, देव कुमार विश्वकर्मा, बसावन गुप्ता, अमरनाथ सूर्य, बुद्धि सेन मिश्रा, राम दुलारे, नंदू यादव, बाबू लाल चेरो, नागेंद्र कुमार, विरेन्द्र कुमार गोंड़, तारकेश्वर गुप्ता, जगरनाथ बैगा, रामजनम कुशवाहा और धनुक पनीका ने संबोधित किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में भाकपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।



