Sonbhadra News: गौ सेवा को बढ़ावा दे रही प्रदेश सरकार, निराश्रित गोवंश संरक्षण में दिख रहे सकारात्मक परिणाम.
प्रदेश में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थलों में 16 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। सरकार प्रत्येक गोवंश के भरण-पोषण हेतु 50 रुपये प्रतिदिन की सहायता डीबीटी के माध्यम से दे रही है। सोनभद्र जनपद में 8 गौशालाओं में 2,814 गोवंश संरक्षित हैं और 368 गोपालकों ने 1,057 गोवंश को अपनाया है। गौशालाओं की निगरानी के लिए हजारों सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।
sonbhadra
4:50 PM, Apr 11, 2026
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सरकार ने गौ संरक्षण में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई और जनसहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया है।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गौ सेवा को सुशासन का आधार मानते हुए निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से न केवल गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। उपाध्यक्ष गो- सेवा आयोग उ.प्र. महेश कुमार शुक्ल ने बताया प्रदेश में वर्तमान समय में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 16 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश को संरक्षित किया जा रहा है। इन आश्रय स्थलों पर गोवंश के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही सरकार द्वारा प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भरण-पोषण की धनराशि डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। गौशालाओं के संचालन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 5,446 से अधिक स्थलों पर 7,592 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो 24 घंटे निगरानी करते हैं। इसके अलावा “मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना” के तहत अब तक 1,67,065 गोवंश को गोपालकों को सौंपा गया है, जिससे लोगों की भागीदारी भी बढ़ी है और उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। जनपद सोनभद्र में भी गौ संरक्षण को लेकर उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। यहां 8 गौ-आश्रय स्थलों में 2,814 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि 368 गोपालकों ने 1,057 गोवंश को अपनाकर योजना को सफल बनाने में योगदान दिया है। सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम 1955 के तहत गोवंश संरक्षण के लिए सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे गोवंश को सड़कों पर न छोड़ें और कूड़ा-कचरा खुले में न फेंकें, जिससे गोवंश के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरकार का उद्देश्य गौ सेवा के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संतुलन को मजबूत करना है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गौ सेवा को सुशासन का आधार मानते हुए निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गोवंश को सुरक्षित आश्रय देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है। उपाध्यक्ष गो-सेवा आयोग उ.प्र. महेश कुमार शुक्ल ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। इन आश्रय स्थलों पर गोवंश के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार द्वारा प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की दर से भरण-पोषण सहायता डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जा रही है। गौशालाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 5,446 से अधिक स्थलों पर 7,592 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं। वहीं “मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना” के तहत अब तक 1,67,065 गोवंश गोपालकों को सौंपे जा चुके हैं, जिससे जनसहभागिता और आय दोनों में वृद्धि हुई है। जनपद सोनभद्र में भी गौ संरक्षण को लेकर उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। यहां 8 गौ-आश्रय स्थलों में 2,814 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि 368 गोपालकों ने 1,057 गोवंश को अपनाकर योजना को सफल बनाया है। सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम 1955 के तहत सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं और अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही डेयरी प्रोत्साहन योजनाओं के तहत प्रत्येक ब्लॉक में चयनित लाभार्थियों को 50 प्रतिशत अनुदान देकर भारतीय नस्ल के गौवंश पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। “नंद बाबा गौशाला योजना” के अंतर्गत भी लोगों की भागीदारी बढ़ी है और कई लाभार्थियों ने डेयरी संचालन शुरू किया है। अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि वे गोवंश को सड़कों पर न छोड़ें और कूड़ा-कचरा खुले में न फेंकें, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरकार का उद्देश्य गौ सेवा के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संतुलन को मजबूत करना है।
