Sonbhadra News: यूजीसी की नीतियों के खिलाफ सवर्ण आर्मी का जोरदार प्रदर्शन, छात्र विरोधी बताते हुए बिल वापस लेने की मांग.
जनपद में यूजीसी की नीतियों के विरोध में सवर्ण सेना ने जोरदार प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों ने छात्र हितों को लेकर नारेबाजी की और यूजीसी बिल वापस लेने की मांग की। यह प्रदर्शन सवर्ण आर्मी के बैनर तले आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और समाज के सदस्य शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी की नीतियों को छात्र विरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की अपील की।
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12:58 PM, Jan 27, 2026
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जिलाध्यक्ष अशोक दुबे ने आरोप लगाया कि यह कानून विभिन्न जातियों के बीच टकराव को बढ़ावा देगा।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
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जनपद में यूजीसी की नीतियों के विरोध में सवर्ण सेना ने जोरदार प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों ने छात्र हितों को लेकर नारेबाजी की और यूजीसी बिल वापस लेने की मांग की। यह प्रदर्शन सवर्ण आर्मी के बैनर तले आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और समाज के सदस्य शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी की नीतियों को छात्र विरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की अपील की। सवर्ण आर्मी ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया और यूजीसी बिल वापस नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष अशोक दुबे ने बताया कि यूजीसी के नए कानून में एक विशेष जाति को संरक्षण दिया गया है। उनके अनुसार, यह कानून विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे सवर्ण समाज के छात्रों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा करेगा। दुबे ने आरोप लगाया कि यह कानून विभिन्न जातियों के बीच टकराव को बढ़ावा देगा, जिससे सामान्य वर्ग, ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों के बीच जातिगत संघर्ष बढ़ सकता है। उन्होंने भाजपा सरकार पर जातिवाद फैलाने का आरोप लगाते हुए कानून वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने घोषणा की कि इस मुद्दे पर 22 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा। यूजीसी कानून की एक प्रमुख कमी बताते हुए दुबे ने कहा कि इसमें एक 'डिप्टी कमेटी' का प्रावधान है। उनका दावा है कि यह कमेटी ओबीसी और एससी छात्रों द्वारा सवर्ण छात्रों के खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी पर बिना जांच के तुरंत कार्रवाई करेगी, जबकि सवर्ण छात्रों की शिकायतों पर सुनवाई नहीं होगी। संगठन की जिला महिला सचिव आरती पांडेय ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि यह विरोध यूजीसी एक्ट में स्वर्ण समाज के साथ कथित भेदभाव के खिलाफ है। आरती पांडेय के अनुसार, यूजीसी एक्ट में स्वर्णों के साथ भेदभावपूर्ण प्रक्रिया अपनाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक्ट एससी-एसटी वर्ग के बच्चों की पढ़ाई से संबंधित है और समाज में स्वर्णों के खिलाफ जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देकर आपसी संघर्ष पैदा कर रहा है। स्वर्ण आर्मी की मुख्य मांग है कि जातिगत आरक्षण को पूरी तरह समाप्त किया जाए ताकि सभी को समान अवसर मिल सकें। उनका तर्क है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का बंटवारा गलत है और समानता के सिद्धांत के विपरीत है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि यदि स्वर्ण समाज का कोई व्यक्ति एससी-एसटी वर्ग के खिलाफ कुछ कहता है, तो बिना जांच के तुरंत एससी-एसटी एक्ट लगा दिया जाता है। वहीं, यदि एससी-एसटी या ओबीसी वर्ग के लोग ऐसी ही गलती करते हैं, तो उनके खिलाफ तत्काल कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती है। स्वर्ण आर्मी ने अपनी मांगों को लेकर भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है। संगठन ने बताया कि 22 फरवरी 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
