Sonbhadra News: सोनभद्र खनन टेंडर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, 3 अगस्त को अगली सुनवाई.
सोनभद्र के बिल्ली-मारकुंडी खनन टेंडर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 8 मई 2026 के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें अधिक बोली लगाने वाली कंपनियों के पक्ष में एलओआई जारी करने का निर्देश दिया गया था। मां दुर्गा माइनिंग वर्क्स की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 तय की है।
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6:19 PM, Jun 12, 2026
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सोनभद्र खनन टेंडर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक।
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Story By: आर. एन. पाण्डेय, ओबरा तहसील।
सोनभद्र।
सुप्रीम कोर्ट ने सोनभद्र के खनन टेंडर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी है। जिससे पीड़ित पक्ष को बहुत बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने अधिक बोली लगाने वाली कंपनियों को लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी करने का निर्देश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी। यह मामला 12 जनवरी 2026 को सोनभद्र-बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र के भूमिधरी पट्टों के लिए हुई ई-नीलामी से जुड़ा है। इस नीलामी में कांत कंस्ट्रक्शन ने एक पट्टे के लिए 1051 रुपये प्रति घन मीटर की उच्चतम बोली लगाई थी, जबकि इसका आधार मूल्य 165 रुपये तय किया गया था। हालांकि, कांत कंस्ट्रक्शन की बोली यह कहते हुए रद्द कर दी गई कि उसने एफिडेविट, डिमांड ड्राफ्ट और चालान की हार्ड कॉपी जमा नहीं की थी। इसके बाद, यही पट्टा मां दुर्गा माइनिंग वर्क्स को 207 रुपये प्रति घन मीटर की कम बोली पर दे दिया गया। इसी तरह, दो अन्य पट्टों के लिए 333-333 रुपये की बोलियां भी रद्द कर दी गईं और ठेके 201 तथा 202 रुपये की बोली लगाने वाली कंपनियों को दिए गए।
मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस अरिंदम सिन्हा और सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने इसे नीलामी प्रक्रिया में हेराफेरी माना। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी द्वारा जारी LOI को रद्द कर दिया और प्रशासन को 8 मई 2026 तक याचिकाकर्ता कांत कंस्ट्रक्शन कंपनी और रुद्रा एंटरप्राइजेज के पक्ष में नया LOI जारी करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश को मां दुर्गा माइनिंग वर्क्स ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और इलाहाबाद हाईकोर्ट के 8 मई के LOI आदेश को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया।
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गौरतलब हो कि, सुप्रीम कोर्ट ने 11 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल करने की अनुमति देते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 8 मई 2026 के उस आदेश पर अंतरिम रोक भी लगा दी है, जिसमें लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी करने का निर्देश दिया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी। सुनवाई के दौरान एम/एस कांत कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने की अनुमति दी है। अन्य प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं को नोटिस की सेवा कराने की अनुमति भी दी गई है।
न्यायालय ने प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है, जिसके बाद याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) दाखिल करने की छूट प्रदान की गई है। मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 8 मई 2026 के आदेश के उस हिस्से पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें संबंधित पक्ष के पक्ष में लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी करने का निर्देश दिया गया था। यह अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी। सभी पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी। यह सुनवाई खनन क्षेत्र और संबंधित पक्षों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
