Sonbhadra News: प्रदूषण और दुर्गंध के खिलाफ व्यापारियों का सांकेतिक धरना प्रदर्शन, अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट की मनमानी के खिलाफ बुलंद की आवाज़.
डाला में अल्ट्राटेक प्लांट से फैल रहे प्रदूषण और दुर्गंध के खिलाफ व्यपारियों ने सांकेतिक धरना दिया। विरोध प्रदर्शन में व्यापारियों ने दुकानें बंद कर हिस्सा लिया। आरोप है कि कंपनी पिछले लगभग एक साल दस महीने से बाहरी जिलों से मंगाकर लगातार गीला और सूखा कचरा जला रही है। इसके जलने से दुर्गंध पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रही है, जिससे नगरवासियों के स्वास्थ्य और जनजीवन पर बुरा असर पड़ रहा है।
sonbhadra
6:05 PM, Dec 11, 2025
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स्थानीय लोगों और व्यपारियों ने कंपनी पर हिटलरशाही का आरोप लगाकर किया सांकेतिक प्रदर्शन।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
डाला स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट से फैल रहे प्रदूषण और दुर्गंध के खिलाफ स्थानीय लोगों ने सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अल्ट्राटेक कंपनी पिछले लगभग एक साल दस महीने से लगातार गीला और सूखा कचरा जला रही है। यह कचरा बाहरी जिलों से लाया जाता है। इसके जलने से निकलने वाली दुर्गंध पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रही है, जिससे नगरवासियों के स्वास्थ्य और जनजीवन पर बुरा असर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों, जन प्रतिनिधियों और समाजसेवियों द्वारा विगत वर्षों से लगातार कई बार जिला प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया गया है। जांचें भी हुई हैं, लेकिन समस्या का हल नहीं निकल पाया। वही कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी को फोन लगाने पर अधिकारी का फोन नहीं उठा जिस वजह से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं, कंपनी उस दिन कचरा नहीं जलाती और बचाव के लिए सेंट आदि का छिड़काव कर देती है। इससे प्रशासन को गलत रिपोर्ट दी जाती है।नगरवासियों का कहना है कि उन्हें लगातार दुर्गंधयुक्त वातावरण में जीवन जीने को मजबूर किया जा रहा है।
इस कार्रवाई से आहत होकर हाल ही में नगरवासियों ने अपनी दुकानें बंद कर रामलीला मैदान में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अल्ट्राटेक कंपनी द्वारा प्रदूषण और दुर्गंध के बचाव में कोई सार्थक पहल नहीं की जाती है, तो भविष्य में वे आमरण अनशन और धरना प्रदर्शन करेंगे। यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक इस दूषित वातावरण में सुधार नहीं हो जाता।
स्थानीय निवासी विशाल गुप्ता ने बताया कि अल्ट्राटेक प्लांट से निकलने वाला प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि दुर्गंध के कारण घरों में रहना और खाना-पीना दूभर हो गया है। उन्होंने कहा कि यह दुर्गंध चैंबर की बदबू से भी ज्यादा खराब है और बर्दाश्त से बाहर है। गुप्ता ने आरोप लगाया कि कंपनी अपनी सफाई में कूड़े को जलाने के दौरान केमिकल डालने की बात कहती है, जिससे बदबू आती है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि एक बार एसडीएम और नगर अध्यक्षा के साथ कंपनी के दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि कूड़ा ले जाने वाली गाड़ियां खुली थीं और बदबू छिपाने के लिए उन पर सेंट का छिड़काव किया जा रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि इलाहाबाद और कानपुर से आने वाले कूड़े में मृत जानवर भी होते हैं, जिससे दुर्गंध और फैलती है।
स्थानीय लोगों ने अल्ट्राटेक के कन्वेयर बेल्ट से भी प्रदूषण फैलने की शिकायत की। उनका कहना है कि कन्वेयर पर न तो जाली लगी है और न ही पानी का छिड़काव किया जाता है, जिससे धूल पूरे वातावरण में फैल जाती है। धूल एवं ध्वनि प्रदूषण से आसपास के लोगों का जीना मुहाल है, आसपास के लोगों की खेत की सभी फैसले बर्बाद है। इस संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और रॉबर्ट्सगंज प्रदूषण विभाग में शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।
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नगर पंचायत की बोर्ड मीटिंग में भी कंपनी के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) दायर करने पर चर्चा हुई है। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो जल्द ही पीआईएल दाखिल की जाएगी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फेफड़ों में दुर्गंध जाने से स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि आज नहीं तो कल इस दुर्गंध के कारण स्थानीय लोगों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा।
लक्ष्मण नगर के निवासी अनुज कुमार ने बताया कि अल्ट्राटेक प्लांट बाहर से कचरा मँगवाता है। इस कचरे से गटर के चैंबर जैसी दुर्गंध आती है, जिससे साँस लेने में दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि रोजाना दो-तीन गाड़ियाँ कचरे की आती हैं। शाम के समय दुर्गंध इतनी बढ़ जाती है कि बच्चे बाहर नहीं निकल पाते। अनुज कुमार ने यह भी बताया कि एक बार कचरे की गाड़ी में सड़ा हुआ मरा कुत्ता भी पाया गया था। उन्होंने अपनी स्वास्थ्य समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि वे खुद साँस लेने की दिक्कत के मरीज हो गए हैं, जबकि उनका घर प्लांट से मात्र 50 कदम दूर है।
अनुज कुमार के अनुसार, समस्या के समाधान के लिए बात करने पर प्लांट अधिकारी आश्वासन देते हैं कि अब दुर्गंध नहीं आएगी, लेकिन अगले ही दिन स्थिति वैसी ही हो जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सूखे कचरे को जलाने की बात झूठी थी, और अब लगातार गीला कचरा जलाया जा रहा है, जिससे फेफड़ों में दिक्कत और साँस लेने में परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने कई विभागों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि प्लांट के पास कचरा जलाने की अनुमति है। इस पर स्थानीय निवासियों ने सवाल उठाया कि यदि कचरा जलाने की अनुमति है, तो क्या इसका मतलब यह है कि वे किसी का घर बर्बाद कर सकते हैं या किसी को बीमार कर सकते हैं।
ग्राम पंचायत सदस्य बिल्ली मारकुंडी गोविंद भारद्वाज ने बताया कि वे पिछले करीब एक साल से प्रदूषण से परेशान हैं। उन्होंने अल्ट्राटेक कंपनी पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, कंपनी से सुबह, दोपहर और शाम को अत्यधिक प्रदूषण निकलता है। भारद्वाज ने यह भी बताया कि कंपनी बाहर से आने वाले वेस्टेज कूड़े को जलाती है, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि कचरा जलाने के नियम होते हैं, लेकिन कंपनी उनका पालन नहीं कर रही है। स्थानीय चौकी, एसडीएम और डीएम को भी ज्ञापन के माध्यम से इस मामले में हस्तक्षेप करने की सूचना दी गई थी।
हालांकि, निवासियों का कहना है कि स्थिति में सुधार होने के बजाय वे और अधिक परेशान हो गए हैं। शाम के समय बाजार में चलना भी मुश्किल हो जाता है। कचरा जलाने की समस्या के कारण कई लोग बीमार पड़ चुके हैं। सांकेतिक धरने में व्यापारी और आम नागरिक दोनों शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी बात नहीं मानी गई, तो वे आगे की रणनीति बनाएंगे, जिसमें दिल्ली एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) तक जाने की तैयारी भी शामिल है।
