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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news the beats of sonbhadra s karma dance will echo in ayodhya deepotsav 15 member team arrived

Sonbhadra News: अयोध्या दीपोत्सव में गूंजेगी सोनभद्र के करमा नृत्य की थाप, 15 सदस्यीय टीम पहुंची.

बभनी के 15 सदस्यीय करमा नृत्य कलाकारों के दल को अयोध्या दीपोत्सव में लोककला प्रदर्शन का अवसर मिला है। लोककला प्रमुख अमरजीत गोड़ के नेतृत्व में टीम अयोध्या पहुंच चुकी है। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ करमा नृत्य प्रस्तुत कर सोनभद्र की आदिवासी संस्कृति की छटा बिखेरेंगे।

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2:35 PM, Nov 7, 2026

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Sonbhadra News: अयोध्या दीपोत्सव में गूंजेगी सोनभद्र के करमा नृत्य की थाप, 15 सदस्यीय टीम पहुंची.
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अयोध्या दीपोत्सव में सोनभद्र के करमा लोकनृत्य कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा और मांदर की थाप से लोकसंस्कृति की छटा बिखेरी।

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Story By: चंद्रशेखर पाण्डेय, बभनी।

विकास खंड बभनी के करमा नृत्य कलाकारों को अयोध्या में आयोजित हो रहे दीपोत्सव कार्यक्रम में अपनी लोककला का प्रदर्शन करने का अवसर मिला है। सोनभद्र की 15 सदस्यीय कलाकारों की जिला स्तरीय टीम अयोध्या पहुंच चुकी है। टीम का नेतृत्व लोककला प्रमुख अमरजीत गोड़ कर रहे हैं। कलाकार दीपोत्सव कार्यक्रम में पारंपरिक करमा नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर सोनभद्र की समृद्ध आदिवासी लोकसंस्कृति की छटा बिखेरेंगे। कार्यक्रम के तहत सबसे पहले रोड शो का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और लोककला के माध्यम से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद दीपोत्सव के मुख्य आयोजन में करमा नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। इस टीम में लालमन, अमेरिकन, सहदेव, शंखलाल सहित 15 कलाकार शामिल हैं। करमा नृत्य आदिवासी समाज की प्राचीन और समृद्ध लोकपरंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मुख्य रूप से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में करमा पर्व के अवसर पर किया जाता है। यह नृत्य कर्म देवता और करम वृक्ष की पूजा से जुड़ा है। नई फसल के आगमन, प्रकृति के प्रति आभार, श्रम और सामूहिक खुशहाली की भावना इस नृत्य में दिखाई देती है। इस नृत्य में महिला और पुरुष कलाकार गोल घेरा बनाकर मांदर, ढोल, टिमकी, झांझ और मंजीरा की थाप पर लयबद्ध तरीके से कदम मिलाते हैं। पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीत इसकी विशेष पहचान हैं। कलाकारों का कहना है कि अयोध्या जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थान पर सोनभद्र की लोककला प्रस्तुत करना गौरव की बात है। इस आयोजन के माध्यम से लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के साथ ही आदिवासी परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।


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