Sonbhadra News: आजादी के बाद से बदहाल सड़क, प्रशासन से थककर ग्रामीणों ने खुद उठाया बीड़ा.
तेन्दूघुटरा से चौना जाने वाले जंगल मार्ग की बदहाल हालत से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से थककर खुद सड़क सुधारने का बीड़ा उठाया। चंदा जुटाकर जेसीबी से गड्ढे भरवाए जा रहे हैं और ट्रैक्टर से सोलिंग डाली जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे।
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12:12 PM, Sep 9, 2026
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ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर जेसीबी की मदद से टेंढुगुघरा-चौना जंगल मार्ग की मरम्मत शुरू कराई।
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Story By: चंद्रशेखर पाण्डेय, बभनी।
सोनभद्र।
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घघरी-बभनी क्षेत्र के जंगल मार्ग तेन्दूघुटरा से चौना रोड की खराब हालत अब ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क आजादी के बाद से ही खराब है। बरसात के दिनों में हालत और बिगड़ जाती है। कीचड़, गड्डों और पानी भरने से ग्रामीणों, बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली छात्रों को आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है। समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने पहले प्रशासन से मदद मांगी। हाल ही में 7-8 बार से ज्यादा बार लिखकर अधिकारियों को बताया गया। अखबारों और सोशल मीडिया के जरिए भी सड़क की खराब हालत लगातार सामने रखी गई। इसके बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने जून महीने में धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की। धरना-प्रदर्शन के बाद भी हालात नहीं बदले। इसके बाद ग्रामीणों ने श्रमदान कर अपने स्तर पर रास्ते को चलने लायक बनाने की कोशिश की। लेकिन इससे भी पक्का समाधान नहीं मिला। आखिरकार ग्रामीणों और युवाओं ने प्रशासन का इंतजार छोड़ खुद सड़क सुधारने का फैसला किया। ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर सड़क बनाने और सुधारने का काम शुरू कराया। जेसीबी की मदद से सड़क से मलबा हटाया जा रहा है, गड्ढे भरे जा रहे हैं और रास्ते को समतल किया जा रहा है। ट्रैक्टर से सोलिंग भी डाली गई है, ताकि बरसात में भी आने-जाने में कुछ आसानी हो सके। इस पहल की जिम्मेदारी सोमरू प्रसाद, अजनी और अखिलेश ने ली। मौके पर दूसरे ग्रामीण भी मौजूद रहे और उन्होंने सहयोग किया। इस पहल की जिम्मेदारी सोमरू प्रसाद, अजनी और अखिलेश ने ली। मौके पर दूसरे ग्रामीण भी मौजूद रहे और उन्होंने सहयोग किया। ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है। उनका कहना है कि जब जनता धरना दे, श्रमदान करे, बार-बार पत्र लिखे और अखबारों व सोशल मीडिया के जरिए समस्या उठाए, फिर भी सुनवाई न हो तो आखिर ग्रामीण किससे उम्मीद करें? ग्रामीणों ने सबने मिलकर चेतावनी दी है कि यदि अब भी प्रशासन ने सड़क पर ध्यान नहीं दिया और पक्का समाधान नहीं कराया तो आने वाले विधानसभा चुनाव में वे वोट नहीं डालेंगे।



