Sonbhadra News: डाला में सरकारी पैसे पर पानी के लिए फिरा पानी! 10 लाख का जल पंप तीन साल से बेकार.
डाला नगर पंचायत के वार्ड नंबर-10 स्थित लक्ष्मण नगर में करीब 10 लाख रुपये की लागत से लगाया गया सौर ऊर्जा आधारित जल पंप तीन वर्षों बाद भी चालू नहीं हो सका है। वार्ड सदस्य बिंदु सिंह ने गलत स्थान पर जल पंप लगाने और उनकी आपत्ति को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 50 परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
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12:41 PM, Jul 10, 2026
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अपनी दुर्दशा पर आंशु बहाता सौर ऊर्जा आधारित जल पंप।
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Story By: आर. एन. पाण्डेय, डाला।
सोनभद्र।
जनपद के डाला नगर पंचायत के वार्ड नंबर-10 स्थित लक्ष्मण नगर में लगभग 10 लाख रुपये की लागत से स्थापित सौर ऊर्जा आधारित जल पंप योजना तीन वर्ष बाद भी पूरी तरह विफल साबित हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस दिन से यह जल पंप लगाया गया, उसी दिन से यह बंद पड़ा है और आज तक क्षेत्र के लोगों को दुर्गन्ध की वजह से एक बूंद भी पेयजल उपलब्ध नहीं हो सका।
वार्ड सदस्य बिंदु सिंह ने बताया कि यह जल पंप सुखसागर पुत्र स्वर्गीय हंसराज की भूमि पर लगाया गया है। उनका कहना है कि इसी स्थान पर पहले से हैंडपंप था, जिससे हमेशा दुर्गंधयुक्त पानी निकलता था। उन्होंने निर्माण से पहले ही नगर पंचायत अध्यक्ष को इस स्थान पर जल पंप नहीं लगाने की सलाह दी थी, लेकिन उनकी आपत्ति को नजरअंदाज कर कार्य पूरा करा दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार वार्ड के लगभग 50 परिवार इस योजना से लाभान्वित होने वाले थे, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला।
लोगों ने आरोप लगाया कि जल पंप अध्यक्ष के रिश्तेदार के यहां लगाया गया, ताकि भविष्य में सिंचाई के लिए इसका उपयोग किया जा सके। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। वार्ड सदस्य का कहना है कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायत, टेलीफोन और व्यक्तिगत रूप से नगर पंचायत अध्यक्ष तथा अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले में डाला नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी ने बताया कि समस्या की जानकारी है। नए स्थान पर बोरिंग कराने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही जल पंप को स्थानांतरित कर चालू कराया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब पहले से ही संबंधित स्थान पर जल स्रोत और बदबू आने की समस्या की जानकारी थी, तो आखिर 10 लाख रुपये की सरकारी राशि वहां खर्च क्यों की गई। लोगों का कहना है कि यदि योजना तकनीकी जांच के बिना बनाई गई, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
साथ ही लोगों ने यह भी मांग उठाई कि डाला, चोपन और ओबरा तीनों नगर पंचायतों का प्रभार एक ही अधिशासी अधिकारी के पास होने के कारण स्थानीय समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने मांग की कि अधिशासी अधिकारी सप्ताह में कम से कम चार दिन तय पोस्टिंग स्थान डाला नगर पंचायत में रहकर जनसमस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित करें।
