Sonbhadra News: ओबरा इंटर कॉलेज को डीएवी को सौंपे जाने के तीन वर्ष पूरे, महंगी फ़ीस व व्यवस्थाओं पर उठे सवाल.
ओबरा इंटर कॉलेज को डीएवी प्रबंधन के अधीन किए जाने के तीन वर्ष पूरे होने पर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व छात्र विकास कुमार 'हलचल' ने विद्यालय की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाते हुए इसे गरीब, आदिवासी और वनवासी छात्रों के हितों के खिलाफ बताया है। वहीं समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड ने भी माना कि सीबीएसई पैटर्न लागू होने से गरीब छात्रों को कठिनाइयों हो रही।
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11:59 AM, Jun 12, 2026
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राज्यमंत्री ने भी माना गरीब छात्र हित में हुआ गलत निर्णय.
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।
सोनभद्र।
ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज को डीएवी प्रबंधन के अधीन किए जाने के तीन वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवधि में विद्यालय की वर्तमान स्थिति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व छात्र विकास कुमार 'हलचल' ने दावा किया है कि डीएवी को विद्यालय सौंपने का निर्णय क्षेत्र के गरीब, आदिवासी और वनवासी छात्रों के हित में नहीं रहा, जिससे शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जब से ओबरा इंटर कॉलेज सीबीएसई पैटर्न पर चला गया है, उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिक्षा मंत्री और जनपद के जिलाधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया है।
मंत्री के अनुसार, यह क्षेत्र दूरस्थ है और यहां के गरीब बच्चे कम फीस में पढ़ते थे, लेकिन सीबीएसई होने के कारण फीस अधिक हो गई है, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। संजीव कुमार गोंड ने बताया कि जिलाधिकारी के साथ हुई एक बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था। उस बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द एक योजना बनाकर यह सुनिश्चित करें कि ओबरा इंटर कॉलेज पहले की तरह ही चले, ताकि गरीब छात्रों को सहूलियत मिल सके। राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2022 में ओबरा इंटर कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया बंद किए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद कुछ समय के लिए प्रवेश दोबारा शुरू कराया गया था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में विद्यालय को डीएवी के हवाले कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप छात्र संख्या में भारी गिरावट आई है। उनके दावे के अनुसार, जहां पहले विद्यालय में 1500 से अधिक छात्र अध्ययनरत थे, वहीं वर्तमान में यह संख्या 50 से भी कम रह गई है। विकास कुमार 'हलचल' ने विद्यालय में शिक्षकों की कमी, विषय विशेषज्ञों के अभाव, पेयजल व्यवस्था की खराब स्थिति और साफ-सफाई की कमी जैसे आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है और कई विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो रही है। उन्होंने कुछ छात्रों को नियमों के विपरीत उत्तीर्ण किए जाने तथा फीस व टीसी से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं।
बयान में यह भी कहा गया कि वर्ष 2021 से लेकर अब तक विद्यालय की स्थिति को लेकर कई स्तरों पर आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन और ऑनलाइन शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से विद्यालय की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराने तथा क्षेत्र के गरीब विद्यार्थियों के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
