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Sonbhadra News: जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर आदिवासी परिवारों का हुंकार, अधिकार बचाने का लिया संकल्प.

ससनयी स्थित डीह बाबा स्थल पर आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार शामिल हुए। वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन को जीवन रक्षा का आधार बताते हुए इनके संरक्षण पर जोर दिया। बैठक में कथित पेड़ कटान और भूमि अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। आदिवासी परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

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6:45 PM, Jun 23, 2026

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Sonbhadra News: जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर आदिवासी परिवारों का हुंकार, अधिकार बचाने का लिया संकल्प.
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जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी अधिकारों को लेकर ससनयी में जुटे ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया।

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Story By: कन्हैया लाल यादव, ससनयी।

तरिया क्षेत्र के पारिवारिक जनों के आह्वान पर कोन ब्लॉक के ससनयी स्थित डीह बाबा स्थल पर बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा, वन संरक्षण तथा आदिवासी समुदाय के परंपरागत अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र ने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि जीवन रक्षा की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि इनकी सुरक्षा पूरे मानव समाज के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग फर्जी हस्ताक्षर और मोहर के माध्यम से आदिवासी परिवारों के अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी परिवार की भूमि, आवास या वन अधिकारों पर अतिक्रमण अथवा दबाव बनाने की कोशिश की गई तो उसका लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से विरोध किया जाएगा। बैठक में “पेड़ हैं तो प्राण हैं” अभियान के जिला संयोजक रामसूरत खरवार ने कहा कि जंगल आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कथित तौर पर ग्रीनको कंपनी को बड़ी संख्या में पेड़ काटने की अनुमति दिए जाने की चर्चा पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में वर्षों से वृक्षारोपण किया गया है तो उसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से आदिवासी परिवारों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े संवैधानिक एवं परंपरागत अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। कार्यक्रम में बासमती गोंड़, गुलाबी चेरो, कन्हैया चेरो, जोगेंद्र यादव, दिनेश चेरो, विंदू खरवार, आकाश चौहान, मुखलाल चेरो, गुलाब चेरो समेत सैकड़ों आदिवासी परिवारों के सदस्य मौजूद रहे। बैठक के दौरान अधिकारों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सामूहिक संकल्प भी लिया गया।


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