मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news two innocent sisters left home after being scolded by their mother remained unsafe at the station all night due to the negligence of grp

Sonbhadra News: मां की डांट से घर छोड़ निकलीं दो मासूम बहनें, जीआरपी की लापरवाही से रातभर स्टेशन पर रहीं असुरक्षित.

दुद्धी क्षेत्र की दो नाबालिग सगी बहनें मां की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर म्योरपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गईं। आरोप है कि जीआरपी को पूरी जानकारी देने के बावजूद उन्हें रातभर स्टेशन पर ही छोड़ दिया गया। अगली सुबह दोनों गलत ट्रेन में बैठकर रॉबर्ट्सगंज पहुंच गईं। बाद में बाल संरक्षण इकाई ने दोनों को सुरक्षित संरक्षण में लेकर परिजनों से संपर्क किया और आगे की कार्रवाई शुरू की।

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5:45 PM, Jul 10, 2026

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Sonbhadra News: मां की डांट से घर छोड़ निकलीं दो मासूम बहनें, जीआरपी की लापरवाही से रातभर स्टेशन पर रहीं असुरक्षित.
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रॉबर्ट्सगंज में बाल संरक्षण इकाई की टीम की मौजूदगी में सुरक्षित मिलीं घर छोड़कर निकलीं दो नाबालिग सगी बहनें।

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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।

किशोरावस्था की छोटी-छोटी नाराजगी कभी-कभी बड़े हादसों का रूप ले सकती है। दुद्धी क्षेत्र की दो नाबालिग सगी बहनों के साथ घटी घटना ने न केवल परिवारों को झकझोर दिया, बल्कि जिम्मेदार तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुद्धी क्षेत्र से मां की डांट से आहत होकर घर छोड़ने वाली दो नाबालिग सगी बहनों की कहानी ने हर किसी को भावुक कर दिया। दुद्धी रेलवे स्टेशन के समीप सेक्टर नंबर-2 पावर हाउस स्थित काशीराम आवास निवासी महेंद्र की पुत्रियां सीता (17 वर्ष), जो कक्षा 10 की छात्रा है, और मीना (16 वर्ष), कक्षा 6 की छात्रा, मां की डांट से आहत होकर घर छोड़कर निकल गईं। दोनों बहनें रात करीब नौ बजे म्योरपुर रेलवे स्टेशन पहुंचीं। वहां उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद जीआरपी कर्मी को साफ-साफ बताया कि वे घर से नाराज होकर आई हैं और अपने परिवार से अलग हैं। आरोप है कि इतनी संवेदनशील जानकारी मिलने के बावजूद न तो परिजनों को सूचना दी गई, न ही बाल कल्याण समिति या बाल संरक्षण इकाई से संपर्क किया गया। दोनों बच्चियां पूरी रात रेलवे स्टेशन पर असुरक्षित अवस्था में रहीं। सुबह करीब पांच बजे उन्होंने यह सोचकर ट्रेन पकड़ ली कि वह दुद्धी जाएगी, लेकिन ट्रेन गलत दिशा में होने के कारण वे रॉबर्ट्सगंज रेलवे स्टेशन पहुंच गईं। रॉबर्ट्सगंज स्टेशन से दोनों बहनें पैदल बढ़ौली चौराहे तक पहुंचीं। वहां एक राहगीर के मोबाइल से उन्होंने अपने परिजनों को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिवार के साथ-साथ प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलने पर बाल संरक्षण इकाई की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों बच्चियों को सुरक्षित संरक्षण में लिया। आवश्यक पूछताछ के बाद उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई। बड़ी बहन सीता ने बताया कि पिता राजगीर मिस्त्री का काम करते हैं। मां की डांट से दुखी होकर उसने घर छोड़ने का निर्णय लिया और छोटी बहन भी उसके साथ निकल गई। यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि यदि समय रहते जिम्मेदार एजेंसियां संवेदनशीलता से कार्रवाई करतीं, तो दो मासूम बच्चियों को पूरी रात असुरक्षित हालात में भटकना नहीं पड़ता। अब इस मामले में जीआरपी की भूमिका और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं तथा जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की अपेक्षा की जा रही है।


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