Sonbhadra News: जीरो टॉरलेन्स की नीति फेल, रेलवे स्टेशन से सटे BCS इंटरप्राइजेज की खदान पर अवैध खनन व सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप.
ग्राम बिल्ली मारकुण्डी, तहसील ओबरा,सोनभद्र स्थित आराजी संख्या 4412ख, 4412क, 4420, 4422कमी, 7577ख एवं 7575, कुल रकबा 4.85 एकड़ पर मे. बी.सी.एस. इंटरप्राइजेज के पार्टनर चन्द्रभूषण गुप्ता एवं शफीक अहमद निवासी ओबरा, सोनभद्र के नाम मा० जिलाधिकारी सोनभद्र द्वारा 26 मई 2016 से 25 मई 2026 तक 10 वर्षीय पत्थर खनन पट्टा स्वीकृत किया गया है। विभागीय मिलीभगत से उक्त खदान में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की शिकायते।
sonbhadra
2:06 PM, May 11, 2026
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बिल्ली मारकुंडी स्थित बीसीएस इंटरप्राइजेज खदान में सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल, गहरी खाई में जारी खनन कार्य से उठे अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के सवाल।
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Story By: आर. एन पाण्डेय, ओबरा।
सोनभद्र।
ओबरा तहसील क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी स्थित पत्थर खदान को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत कोटा निवासी निर्भय चौधरी ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) वाराणसी को प्रार्थना पत्र भेजकर बीसीएस इंटरप्राइजेज नामक खदान पर अवैध खनन, अत्यधिक विस्फोटक प्रयोग, जल दोहन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है। निर्भय चौधरी के अनुसार बिल्ली रेलवे स्टेशन और रेलवे ओवरब्रिज के समीप संचालित उक्त खदान में लंबे समय से नियमों के विपरीत खनन कार्य किया जा रहा है। जीरो टॉरलेन्स की नीति में पट्टाधारक द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध खनन को अंजाम देना योगी सरकार के साख पर सवाल खड़ा करता है। आने वाले चुनाव में विपक्षी पार्टियों के लिए ये चुनावी मुद्दा बन सकता है। क्योकि खनन विभाग सीएम योगी के पास है और सम्बंधित अधिकारी की भ्रष्टाचार नीति की वजह से योगी सरकार बदनाम हो रही है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि डीजीएमएस द्वारा खदान पर 22/3 आपत्तियां लगाए जाने के बावजूद खनन कार्य बंद नहीं हुआ।
शिकायतकर्ता निर्भय चौधरी।
उन्होंने कहा कि कृष्णा माइनिंग हादसे के बाद कुछ समय के लिए रोक लगाई गई थी, लेकिन बाद में फिर खनन शुरू करा दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्तमान में खदान पर केवल सुधारात्मक कार्य की अनुमति है, इसके बावजूद प्रतिदिन बड़े पैमाने पर बोल्डर का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रतिदिन 500 से अधिक टिपर वाहनों से बोल्डर की निकासी हो रही है, जबकि खदान का वार्षिक पट्टा केवल एक लाख घनमीटर खनन के लिए स्वीकृत है। उनका कहना है कि निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक खनन कर सरकार को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाई जा रही है। निर्भय चौधरी ने आरोप लगाया कि खदान में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। नियमों के अनुसार खनन के दौरान ब्रेंच बनाना आवश्यक होता है, लेकिन यहां 200 से 300 फीट गहरी खड़ी पहाड़ियों में सीधे खनन किया जा रहा है।
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उन्होंने आशंका जताई कि रात में कंप्रेसर मशीन लगाकर बड़े पैमाने पर होल कर अत्यधिक विस्फोटक प्रयोग के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खदान रेलवे ओवरब्रिज और रेलवे स्टेशन के बेहद करीब स्थित है, ऐसे में विस्फोट से रेलवे संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा पर भी खतरा बना हुआ है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि खदान में बड़े पैमाने पर जल दोहन किया जा रहा है। लिफ्टर मशीनों के माध्यम से पानी निकाला जा रहा है, जिससे आसपास के भूजल स्तर पर असर पड़ रहा है। वहीं मजदूरों की सुरक्षा की भी अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि खदान में भारी मशीनों से कार्य कराया जा रहा है, लेकिन कुछ मौजूद श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते।
निर्भय चौधरी ने डीजीएमएस और खनन विभाग के कुछ अधिकारियों पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि शिकायत करने पर कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ताओं को धमकियां दी जाती हैं और फर्जी मुकदमों में फंसाने का भय दिखाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। वही ज्येष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप सोनभद्र से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाने की जहमत तक नहीं उठाई।
