Sonbhdra News: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की अवधि बढ़ाने की मांग- कामरेड आर.के. शर्मा.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (उ.प्र.) के राज्य कार्यकारिणी सदस्य और सोनभद्र के जिला सचिव कामरेड आर.के. शर्मा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की अवधि बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित यह अभियान 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा, जो कि मतदाताओं के लिए पर्याप्त नहीं है।
sonbhadra
6:14 PM, Nov 27, 2025
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एसआईआर को लेकर समाज में अफरा-तफरी मची हुई है- कामरेड आर.के. शर्मा
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Story By: चंदन कुमार, चोपन।
सोनभद्र।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (उ.प्र.) के राज्य कार्यकारिणी सदस्य और सोनभद्र के जिला सचिव कामरेड आर.के. शर्मा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की अवधि बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित यह अभियान 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा, जो कि मतदाताओं के लिए पर्याप्त नहीं है। भाकपा नेता ने बताया कि इस सीमित अवधि में मतदाताओं को फॉर्म प्राप्त करने, भरने और बीएलओ से संपर्क करने में भारी कठिनाई हो रही है। यह अभियान ऐसे समय चलाया जा रहा है जब प्रदेश में शादी-विवाह का मौसम है और किसान व खेत मजदूर भी अपनी गतिविधियों में व्यस्त हैं। सोनभद्र जिले की बात करें तो यहां के अधिकांश ग्रामीण और आदिवासी मजदूर इस समय धान की कटाई और रोजगार की तलाश में अन्य जिलों में पलायन कर चुके हैं। 4 दिसंबर 2025 को अभियान समाप्त हो जाएगा, जबकि सोनभद्र भौगोलिक रूप से एक बड़ा जिला है। यहां नेटवर्क की समस्या है और अधिकांश आबादी अशिक्षित है। जिले की चारों विधानसभाओं में कुल 1079 बूथ और 13 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनका एक महीने में सत्यापन असंभव प्रतीत होता है। शर्मा ने कहा कि जनता फॉर्म के लिए परेशान है और बीएलओ को ढूंढ रही है, वहीं दूसरी ओर बीएलओ को निलंबित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एसआईआर के अनावश्यक दबाव के चलते जौनपुर के गोंडा में तैनात एक शिक्षक और फतेहपुर में एक लेखपाल ने आत्महत्या कर ली है।
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प्रदेश के अन्य स्थानों से भी ऐसी दुखद खबरें सामने आ रही हैं। एसआईआर को लेकर समाज में अफरा-तफरी मची हुई है और लोगों में यह डर है कि फॉर्म न भरने पर उनकी नागरिकता समाप्त न हो जाए, जैसा कि बिहार में मतदाता गणना के दौरान 70 लाख मतदाताओं को बाहर कर दिया गया था। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग साक्षर नहीं हैं, वे स्वयं फॉर्म नहीं भर सकते और उनके पास तत्काल की हालिया फोटो भी उपलब्ध नहीं है। शर्मा ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने इन सभी महत्वपूर्ण कारकों पर ध्यान नहीं दिया है। भाकपा नेता कामरेड आर के शर्मा ने जोर देते हुए कहा कि गहन पुनरीक्षण करवाना है तो कम से कम एक साल का समय होना चाहिए। ताकि प्रत्येक मतदाता को यह समझ में आ जाए कि उसको क्या करना है और फॉर्म को कैसे भरना है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इलेक्शन कमिशन की पक्षधरता सिर्फ सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक हित साधने के लिए ही दिखाई देती है। इलेक्शन कमिशन बिल्कुल भी निष्पक्ष नहीं दिख रहा है। इलेक्शन कमीशन के इस निर्णय के विरुद्ध अनेकों पिटिशन सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। आर के शर्मा यह भी जिक्र किया कि पिछले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के हवाले से एक अखबार ने खबर लिखा है कि 24 नवंबर तक कुल 4 करोड़ 29 लाख गणना फॉर्म जमा हुए हैं जबकि 4 दिसंबर तक 11 करोड़ फार्म जमा होने का लक्ष्य है । इस आंकड़े पर ताज़्जुब होता है। जब 20 दिन में 4.29 करोड़ फार्म ही जमा हुए हैं तो ऐसे में 4 दिसंबर तक 11 करोड़ फार्म जमा होने का लक्ष्य जरा टेढ़ी खीर लगता है। भाकपा नेता कामरेड आर के शर्मा ने इलेक्शन कमिशन से मांग की है कि इन हालात के मद्देनजर इस एक्सरसाइज को तत्काल रोक दिया जाए , लोगों पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए और उत्तर प्रदेश में सन् 2026 में होने वाले पंचायती चुनाव सन् 2024 की वोटर लिस्ट के अनुसार ही करवाए जाएं और एसआईआर के लिए पूरा एक साल का समय दिया जाए ताकि कोई भी वोटर छूटने न पाए और सबके मन से यह भी डर दूर हो कि वोटर न बनने से उनकी नागरिकता चली जाएगी।



